नियमों को ठेंगा दिखाकर तैयार हो रहा ‘मौत का मेला’: ठेकेदारों की मनमानी चरम पर, कागजी एनओसी के भरोसे लोगों की जिंदगी
अज़हर मलिक
काशीपुर के उदयराज हिंदू इंटर कॉलेज मैदान में सज रहा मेला सुरक्षा नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए सीधे तौर पर हादसों को न्योता दे रहा है। आयोजन के लिए जरूरी कागजी औपचारिकताएं और एनओसी तो हासिल कर ली गई हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि ठेकेदारों द्वारा सुरक्षा के बुनियादी मानकों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया है। मेले के लिए चारों तरफ से घिरे मैदान में आने-जाने का सिर्फ एक ही संकरा रास्ता रखा गया है।
सवाल यह है कि अगर मेले के दौरान कोई आगजनी या आपात स्थिति बनती है, तो एक ही गेट से सैकड़ों लोगों की जान कैसे बचाई जाएगी? क्या सुरक्षा के नियम सिर्फ कागजों पर दस्तखत करने के लिए होते हैं या जमीन पर उनका पालन भी होना चाहिए?
सबसे ज्यादा गैर-जिम्मेदारी झूलों के संचालन और उनकी मजबूती को लेकर दिखाई जा रही है।
मौके पर लगे भारी-भरकम झूलों की टेक्निकल फिटनेस रिपोर्ट मांगने पर ठेकेदार और उनके कर्मचारी गोलमोल जवाब दे रहे हैं। कमाई की हवस में बिना पर्याप्त आपातकालीन रास्तों (Emergency Exits) और बिना पुख्ता सुरक्षा इंतजामों के मेला सजाया जा रहा है। नियमों को ताक पर रखकर जनता को सीधे खतरे के मुंह में धकेलने का यह खेल पूरी तरह से ठेकेदारों की मनमानी और हठधर्मिता को दर्शाता है। अगर सुरक्षा नियमों का सख्त पालन कराकर तत्काल अतिरिक्त गेट और झूलों की सही जांच सुनिश्चित नहीं की गई, तो किसी भी संभावित अनहोनी की पूरी जिम्मेदारी मेले के ठेकेदारों की होगी।



