हादसे के बाद जागी प्रशासनिक कुंभकर्णी नींद: हल्द्वानी में सात कोचिंग सेंटरों पर सीलिंग तो हुई, लेकिन सवाल है कि मौत के ये सौदागर अब तक किसकी शह पर फल-फूल रहे थे?
लखनऊ में जब मासूम जिंदगियां आग की लपटों में खाक हो गईं और एक बड़ा हादसा हो गया, तब जाकर आखिरकार नैनीताल जिला प्रशासन की गहरी कुंभकर्णी नींद टूटी है। सवाल बड़ा और बेहद कड़वा है कि जब तक कोई बड़ी त्रासदी नहीं होती, तब तक ये जिम्मेदार अधिकारी और उनका महकमा किस अंधकार में सोया रहता है? आज हल्द्वानी के मुखानी चौराहा, पनचक्की मार्ग और दुर्गा सिटी सेंटर में जिन बड़े कोचिंग संस्थानों पर सीलिंग की भारी-भरकम कार्रवाई की गई है,
वे कोई रातों-रात खड़े नहीं हुए थे। सालों से शिक्षा माफियाओं का यह पूरा तंत्र बेखौफ होकर हजारों छात्रों की जिंदगी को बारूद के ढेर पर बिठाकर नोट छाप रहा था, लेकिन तब न तो जिला विकास प्राधिकरण को अवैध निर्माण दिखे, न सिटी मजिस्ट्रेट और एसडीएम को नियमों की परवाह हुई, और न ही फायर विभाग को बिना एनओसी के चल रहे इन मौत के कुओं की भनक लगी। आज जो प्रशासनिक अमला भारी पुलिस बल के साथ कैमरों के सामने फर्ज निभाने का ढोंग कर रहा है, उसे जवाब देना होगा कि अब तक वे किस लालच या लापरवाही के चलते आंखें मूंदे बैठे थे? कल्पवृक्ष इंस्टिट्यूट जैसे संस्थानों को नोटिस थमाकर खानापूर्ति की जा रही है, लेकिन सच तो यह है कि जब तक किसी दूसरे शहर में लाशें नहीं गिरतीं, तब तक हल्द्वानी का यह सिस्टम शिक्षा माफियाओं की तिजोरियां भरवाने में मूकदर्शक बना रहता है। आज की यह दिखावटी कार्रवाई जनता के गुस्से को शांत करने का एक जरिया मात्र है, क्योंकि अगर प्रशासन सच में सजग होता, तो इन लापरवाह मगरमच्छों को पैर पसारने का मौका ही नहीं मिलता।
संकल्प कोचिंग सेंटर
प्रदीप एकेडमी-1
प्रदीप एकेडमी-2
जयश्री कॉलेज
तुषार पन्त पी.एम.टी. क्लासेस
जीत IAS कोचिंग सेंटर
फिजिक्स कोचिंग सेंटर



