मालधन नंबर 1: भाग संख्या 140 के 172 मतदाताओं को नोटिस, काम-काज छोड़कर दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर ग्रामीण

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मालधन नंबर 1: भाग संख्या 140 के 172 मतदाताओं को नोटिस, काम-काज छोड़कर दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर ग्रामीण

अज़हर मलिक

मालधन नंबर 1 मतदाता सूची सत्यापन और एस.आई.आर. (SIR) प्रक्रिया के तहत जारी हो रहे नोटिस अब मालधन नंबर 1 के ग्रामीणों के लिए बड़ी मुसीबत और मानसिक तनाव का कारण बनते जा रहे हैं। भाग संख्या 140 में दर्ज कुल 557 मतदाताओं में से एक साथ 172 लोगों को नोटिस थमा दिए गए हैं। इतनी बड़ी संख्या में नोटिस जारी होने के बाद से ही पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी और चिंता का माहौल बना हुआ है।

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नोटिस का जवाब देने और अपने दस्तावेजों का सत्यापन कराने की चिंता में ग्रामीण अपना रोज़मर्रा का काम-काज छोड़कर दफ्तरों और केंद्रों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। सबसे ज्यादा मार गरीब दिहाड़ी मजदूरों, छोटे किसानों और बुजुर्गों पर पड़ रही है। रोज़ मेहनत-मजदूरी करके अपने परिवार का पेट पालने वाले लोगों के लिए एक दिन भी काम पर न जाना सीधे तौर पर उनके चूल्हे पर असर डाल रहा है। कतारों में लगे लोगों का दर्द साफ झलग रहा है—कोई अपनी दिहाड़ी गंवाकर कागजात जुटाने में लगा है, तो कोई परिवार के जरूरी काम छोड़कर दिनभर केंद्र पर लाइन में खड़े रहने को बेबस है।

 

 

 

 

तकनीकी अड़चनों और कागजी औपचारिकताओं को पूरा करने की इस जद्दोजहद में लोगों का कीमती समय और गाढ़ी कमाई, दोनों बर्बाद हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि वोटर लिस्ट की सुचिता और सत्यापन प्रक्रिया जरूरी हो सकती है, लेकिन इसके प्रशासनिक ढर्रे का खामियाजा आम जनता को अपनी रोजी-रोटी गंवाकर चुकाना पड़ रहा है। परेशान ग्रामीणों ने प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि इस प्रक्रिया को सरल बनाया जाए और पंचायत स्तर पर ही विशेष शिविर लगाकर इन नोटिसों का निस्तारण किया जाए, ताकि आम जनता को इस मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना से राहत मिल सके।

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