आजादी के 80 साल बाद भी वन ग्रामों के हक की लड़ाई जारी मूलभूत सुविधाओं को तरसती जनता।
सलीम अहमद साहिल
रामनगर- दिनांक 19 अगस्त 2026 को ग्राम स्तरीय वनाधिकार समिति सुंदरखाल, देवीचौड़ा खत्ता, चौफुला खत्ता एवं धनगढ़ी खत्ता के सदस्यों ने क्षेत्र पंचायत सदस्य एवं उपखंड स्तरीय वनाधिकार समिति की सदस्य बसंती आर्य पूर्व ब्लाक प्रमुख रामनगर तथा तारा सिंह से मुलाकात कर वन ग्रामों को राजस्व ग्राम का दर्जा दिए जाने की मांग को मजबूती से उठाया।
ग्रामीणों ने बताया कि वन अधिकार कानून 2006 के तहत बीती 8 अगस्त को अध्यक्ष, उपखंड स्तरीय वनाधिकार समिति के समक्ष अपने-अपने गांवों को राजस्व ग्राम घोषित किए जाने के संबंध में दावे प्रस्तुत किए जा चुके हैं। अब इन दावों पर उपखंड स्तरीय समिति के समक्ष सुनवाई होनी है।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने अपनी पत्रावलियों में पीढ़ियों से इन वन क्षेत्रों में निवास और जीवन-यापन के साक्ष्यों को संकलित किया है। उनका आग्रह है कि इन दस्तावेजों और ऐतिहासिक साक्ष्यों को गंभीरता से लेते हुए राजस्व ग्राम घोषित करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए।
लेकिन सवाल सिर्फ चार गांवों का नहीं…
आजादी के बाद देश ने विकास की लंबी यात्रा तय की। गांवों तक सड़कें पहुंचीं, बिजली पहुंची, स्कूल और स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार हुआ, लेकिन वन ग्रामों और गोट-खत्तों में रहने वाले हजारों परिवार आज भी बुनियादी सुविधाओं और जमीन पर अपने वैधानिक अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
पीढ़ियां गुजर गईं, लेकिन कई वन ग्रामों के लोगों के लिए जमीन आज भी उनकी होकर भी पूरी तरह उनकी नहीं है। जिस जमीन पर उनके पूर्वजों ने जीवन बिताया, खेती की और अपने परिवारों को पाला, उसी जमीन पर मालिकाना और अधिकार की लड़ाई आज भी अधूरी है।
सवाल यह है कि अगर कोई परिवार चार-चार पीढ़ियों से किसी स्थान पर रह रहा है, उसके पास अपने अस्तित्व और निवास के प्रमाण हैं, तो आखिर उसे सम्मानजनक जीवन के लिए जरूरी सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य और राजस्व ग्राम का दर्जा पाने के लिए दशकों तक इंतजार क्यों करना पड़े?
वन अधिकार कानून 2006 ने ऐसे समुदायों के ऐतिहासिक अन्याय को दूर करने और उनके अधिकारों को मान्यता देने की बात कही थी। ऐसे में अब जरूरत केवल कागजों में कानून होने की नहीं, बल्कि उसकी भावना को जमीन पर उतारने की है।
उपखंड स्तरीय समिति की सदस्य श्रीमती बसंती आर्य ने कहा कि समिति के समक्ष प्रस्तुत सभी दस्तावेजों का नियमानुसार परीक्षण किया जाएगा और कानून के अनुरूप कार्रवाई करते हुए सुंदरखाल, देवीचौड़ा खत्ता, चौफुला खत्ता एवं धनगढ़ी खत्ता को राजस्व ग्राम बनाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि पीढ़ियों से वन ग्रामों में निवास कर रहे लोगों के साथ हो रहे अन्याय को दूर करने के लिए हरसंभव सहयोग किया जाएगा।
अब नजर उपखंड स्तरीय समिति की सुनवाई और आगे होने वाली कार्रवाई पर है। वन ग्रामों के लोग सिर्फ सरकारी कागजों में दर्ज पहचान नहीं, बल्कि दशकों से इस भूमि पर अपना जीवन जी रहे नागरिक हैं। इसलिए उनकी मांग भी स्पष्ट है—कानून का सम्मान हो, उनके ऐतिहासिक अधिकारों को मान्यता मिले और विकास की मुख्यधारा से उन्हें अब और दूर न रखा जाए।
प्रतिनिधिमंडल में प्रेमराम, नंदकिशोर, दीपक गोस्वामी, उत्तम चंद्र, खीमराम, कौशल्या, कमला देवी, ग्राम प्रधान इंद्रलाल सहित अन्य लोग शामिल रहे।



