पर्यटन नगरी रामनगर को बड़ी सौगात: दिव्य प्राकृतिक सुंदरता से समृद्ध टेड़ा-भंडारपानी पर्यटन जोन आज से खुला, विधायक दीवान सिंह बिष्ट और DFO ध्रुव सिंह मटोलिया ने हरी झंडी दिखाकर किया रवाना
रामनगर। विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी रामनगर पहुँचने वाले देश-विदेश के सैलानियों और प्रकृति प्रेमियों के लिए आज का दिन अत्यंत हर्षातिरेक और उत्साह से भरा है। रामनगर वन प्रभाग के अंतर्गत अपनी अनुपम छटा, असीम शांति और समृद्ध जैव विविधता के लिए विख्यात ‘टेड़ा-भंडारपानी पर्यटन जोन’ (सीतावनी वन क्षेत्र) लगभग तीन महीनों के लंबे इंतजार के बाद आज, 15 अक्टूबर 2026 से पर्यटकों के दीदार के लिए पूर्ण रूप से खोल दिया गया है।
आज प्रातः आयोजित भव्य एवं गरिमामय उद्घाटन समारोह में क्षेत्र के जनप्रिय विधायक दीवान सिंह बिष्ट तथा दूरदर्शी व कुशल प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) ध्रुव सिंह मटोलिया ने संयुक्त रूप से फीता काटकर एवं हरी झंडी दिखाकर सफारी जिप्सियों को घने जंगलों की रोमांचक यात्रा के लिए रवाना किया। जिप्सियों के रवाना होते ही समूचा क्षेत्र पर्यटकों के उल्लास और भारत माता के जयकारों से गुंजायमान हो उठा।

प्रकृति का अनुपम उपहार: एकांत शांति, परिंदों का कलरव और रोमांचक वन्यजीव
कार्बेट टाइगर रिजर्व के भीड़भाड़ वाले मुख्य जोनों की तुलना में टेड़ा-भंडारपानी पर्यटन जोन अपनी एकांतता, अलौकिक शांत वातावरण और नैसर्गिक खूबसूरती के लिए जाना जाता है। यहाँ पहुँचते ही घने साल के वृक्षों की ठंडी छाँव और पक्षियों की मधुर चहचहाहट पर्यटकों को एक स्वप्निल दुनिया में ले जाती है। यह क्षेत्र बर्ड वॉचर्स (पक्षी प्रेमियों) के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है, जहाँ देश-विदेश की कई दुर्लभ और रंग-बिरंगी पक्षी प्रजातियाँ देखने को मिलती हैं।
वन्यजीवों की समृद्ध उपस्थिति इस जोन को बेहद खास और रोमांचक बनाती है। यहाँ आने वाले पर्यटकों को गर्जना करते रॉयल बंगाल टाइगर, पेड़ों की ओट में छिपे शर्मीले तेंदुए, विशालकाय एशियाई हाथी, चंचल हिरण, सांभर तथा सुनहरे सियारों के अद्भुत दीदार का रोमांचक अवसर प्राप्त होता है।
त्रेतायुगीन पावन धरा: रामायण काल से जुड़ा अलौकिक एवं पौराणिक इतिहास
यह पर्यटन क्षेत्र केवल अपनी नैसर्गिक सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी अगाध धार्मिक आस्था और प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर के लिए भी जगप्रसिद्ध है। इस मनोरम वन क्षेत्र के मध्य में स्थित पौराणिक सीतावनी (सीताबनी) मंदिर का सीधा संबंध महर्षि वाल्मीकि के पावन आश्रम और रामायण काल से है:
- माता सीता का आश्रय स्थल एवं लव-कुश की जन्मभूमि: पौराणिक धर्मग्रंथों एवं मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्री राम द्वारा त्याग किए जाने के उपरांत जगतजननी माता सीता इसी घने एवं पवित्र जंगल में स्थित महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में रही थीं। इसी तपोभूमि पर उनके दो तेजस्वी पुत्रों—लव और कुश का जन्म हुआ तथा उनकी प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा सम्पन्न हुई।
- सीतेश्वर महादेव एवं सीता-लक्ष्मण धारा: लोकमान्यता है कि माता सीता ने अपनी साधना हेतु इसी स्थल पर स्वयं अपने हाथों से दिव्य शिवलिंग स्थापित कर ‘सीतेश्वर महादेव’ की तपस्या की थी। मंदिर परिसर के पास प्रवाहित होने वाली शीतल एवं निर्मल जलधाराओं को आज भी परम पवित्र ‘सीता धारा’ और ‘लक्ष्मण धारा’ के नाम से पूजा जाता है। पौराणिक आख्यानों के अनुसार माता सीता इसी पवित्र भू-भाग पर धरती माता की गोद में समाहित हुई थीं।
- भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की संरक्षित अमूल्य धरोहर: यद्यपि वर्तमान मुख्य मंदिर का निर्माण 18वीं शताब्दी का माना जाता है, परंतु यहाँ परिसर में स्थापित अलंकृत प्राचीन प्रस्तर खंड, विशाल स्तंभ और सिरविहीन श्री गणेश जी की अति-प्राचीन प्रतिमाएँ इस स्थल के सहस्राब्दियों पुराने इतिहास की गवाही देती हैं। यह ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थल वर्ष 1920 से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित है। प्रतिवर्ष रामनवमी के पावन पर्व पर यहाँ एक विशाल एवं भव्य मेले का आयोजन होता है, जिसमें दूर-दूर से हजारों श्रद्धालु शीश नवाते हैं।
स्थानीय पर्यटन व रोजगार को मिलेगी नई ऊर्जा
टेड़ा-भंडारपानी जोन के खुलने से रामनगर के पर्यटन उद्योग, स्थानीय जिप्सी चालकों, रिसॉर्ट स्वामियों, गाइडों तथा व्यापारियों में खुशी की लहर दौड़ गई है। इस क्षेत्र के पुनः शुरू होने से न केवल पर्यटन व्यवसाय को नई रफ्तार मिलेगी, बल्कि रामनगर आने वाले पर्यटकों को प्रकृति के अद्वितीय सौंदर्य के साथ-साथ आध्यात्मिक ऊर्जा का अविस्मरणीय अनुभव प्राप्त होगा।
विभागीय अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति
शुभारंभ के इस ऐतिहासिक अवसर पर उप प्रभागीय वनाधिकारी (SDO) अंकित बडोला, वनक्षेत्राधिकारी (RO) कृष्णा सिंह मेहरा, समर्पित वन दारोगा बृजमोहन रावत, वन दारोगा महेंद्र सिंह, वन आरक्षी दीपक कुमार, वन आरक्षी सरप सिंह राणा, अनेक अनुभवी नेचर गाइड, जिप्सी चालक एवं स्थानीय नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।



