देवभूमि में बिलखती मां का दर्द और इंसाफ की गुहार: मालधन में उठी मशालें, दुष्यंत गौतम को पद से हटाने की मांग
देवभूमि उत्तराखंड की शांत वादियों में आज एक ऐसी मां की सिसकियां गूंज रही हैं, जिसने अपनी नौ महीने की कोख की कमाई को हमेशा के लिए खो दिया है। जिस बेटी को उंगलियों से पकड़कर चलना सिखाया था, आज उसी अंकिता भंडारी की सुलगती यादों और एक बिलखती मां के आंसुओं ने मालधन की सड़कों पर ऐसा जनसैलाब ला दिया है, जिसे देखकर हर संवेदनशील इंसान का कलेजा कांप उठेगा। रामनगर के मालधन चौड़ में आज सैकड़ों स्थानीय लोगों और आम जनता ने हाथों में जलती हुई मशालें थामकर उस व्यवस्था के खिलाफ खुली बगावत कर दी है, जिसने एक हंसते-खेते परिवार की दुनिया उजाड़ कर रख दी।
साल 2022 के उस काले पन्ने को याद कर आज भी उत्तराखंड का बच्चा-बच्चा सिहर उठता है, जब पौड़ी के वनंतरा रिसॉर्ट में एक युवा बेटी की जिंदगी को बेरहमी से छीन लिया गया था। कोर्ट के फैसलों के बीच आज चार साल बीत चुके हैं, लेकिन उस अंधी व्यवस्था ने आज तक उस मां के आंसुओं का एक कतरा भी नहीं पोंछा है। एक तरफ जहां न्याय की आस में बैठी मां का कलेजा हर रोज टुकड़ों में बंटता है, वहीं दूसरी तरफ इस गंभीर मामले की परछाइयों से जुड़े रहे चेहरों को मलाईदार कुर्सियों से नवाजे जाने ने आग में घी डालने का काम किया है। हाल ही में दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाए जाने के बाद से तो पीड़ित परिवार और न्यायपसंद जनता के सब्र का बांध पूरी तरह टूट चुका है।
आज मालधन की गलियों में जब ब्लॉक प्रमुख मंजू नेगी और ज्येष्ठ ब्लॉक प्रमुख संजय नेगी के नेतृत्व में यह मशाल जुलूस निकला, तो हर आंख नम थी और हर जुबान पर बस एक ही दर्द था कि आखिर एक मां अपनी बेटी की लाश और उसके इंसाफ के लिए कब तक दर-दर की ठोकरें खाती रहेगी। जलती हुई मशालों की रोशनी में सुलगता यह आक्रोश इस बात का गवाह है कि जनता के दिलों में अंकिता के प्रति प्यार और न्याय की उम्मीद आज भी जिंदा है। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने दो टूक शब्दों में मांग उठाई कि दुष्यंत गौतम को तुरंत राज्यपाल पद से बर्खास्त किया जाए और इस हत्याकांड की सुस्त पड़ी सीबीआई जांच में तेजी लाकर उन तमाम पर्दे के पीछे छुपे वीआईपी चेहरों को बेनकाब किया जाए, जिन्हें बचाने के लिए खाकी और सत्ता का पूरा जोर लगा दिया गया था।
संजय नेगी ने खुली चेतावनी देते हुए कहा कि देवभूमि की बेटियों की आबरू और सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने वालों को अब बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि जब-जब इस राज्य की कोई बेटी इंसाफ की भीख मांगती है, तब-तब सत्ता में बैठे लोग पुलिस के बल पर उस आवाज को दबाने की घिनौनी साजिश रचते हैं। लेकिन मालधन की इन सड़कों पर उठी मशालों की यह तपिश अब चेतावनी बन चुकी है। यदि सरकार ने जल्द ही इस मामले में कड़े कदम नहीं उठाए, तो रामनगर की धरती पर ऐसा भूचाल आएगा जो सत्ता के गलियारों तक को हिला देगा। फिलहाल मालधन के अंधेरे आसमान को चीरती हुई ये जलती मशालें और एक मां की अनसुनी चीखें आज पूरे सिस्टम से यह सवाल पूछ रही हैं कि क्या देवभूमि की हर बेटी को ऐसे ही इंसाफ की भीख मांगनी पड़ेगी?




