रायबरेली: साधन सहकारी समिति के मेंटेनेंस में घपले का बड़ा धमाका, घटिया सामग्री से लाखों का चूना!
रायबरेली जिले के शिवगढ़ क्षेत्र में विकास के नाम पर सरकारी धन के बंदरबांट का एक और सनसनीखेज मामला सामने आया है। खंड विकास अधिकारी कार्यालय के ठीक समीप स्थित साधन सहकारी समिति की जर्जर इमारत के मेंटेनेंस कार्य में भ्रष्टाचार की गंध फैल चुकी है। शासन की मंशा और जनता के पैसों की धज्जियां उड़ाते हुए ठेकेदारों की मनमानी चरम पर है। मानक के विपरीत घटिया सामग्री के इस्तेमाल और बड़े घोटाले का आरोप लगाते हुए अब यह मामला जिलाधिकारी के दफ्तर तक पहुंच गया है।
12 लाख की सौगात और ठेकेदार का खतरनाक खेल
शिकायतकर्ता सभासद प्रतिनिधि अरविंद मौर्य के अनुसार, करीब 25 से 30 साल पुरानी खाद समिति की इस इमारत के जीर्णोद्धार और पैकिंग कार्य के लिए शासन द्वारा लगभग 12 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि स्वीकृत की गई है। लेकिन धरातल पर काम का नजारा देखकर हर कोई हैरान है। आरोप है कि ठेकेदार अपनी जेब भरने के चक्कर में गंगा की जली बालू, बेहद घटिया किस्म की सीमेंट और तीसरे दर्जे की ईंटों का बेधड़क इस्तेमाल कर रहे हैं।
मानक की धज्जियां: 6:1 के बजाय 12:1 का मसाला और ठेकेदार की दादागिरी!
तकनीकी नियमों की मानें तो प्लास्टर के काम में 6:1 का अनुपात होना अनिवार्य है, लेकिन मौके पर धड़ल्ले से 10:1 और 12:1 के कमजोर मसाले का लेप चढ़ाया जा रहा है। जब इस खुलेआम जारी लूट पर सभासद प्रतिनिधि अरविंद मौर्य ने ठेकेदार से जवाब-तलब किया, तो ठेकेदार सुधार करने के बजाय रंगदारी पर उतर आया। उसने उल्टे शिकायतकर्ता को खुलेआम धमकी देते हुए कहा, ‘आपको जहां शिकायत करनी है कर दो, मुझे किसी का डर नहीं है!’
चौखट-चौखट भटके शिकायतकर्ता, आईजीआरएस से लेकर अफसरों तक शिकायत
ठेकेदार की इस गुंडागर्दी और सरकारी पैसे के दुरुपयोग के खिलाफ अरविंद मौर्य ने मोर्चा खोल दिया। उन्होंने एसडीएम महराजगंज, जिलाधिकारी रायबरेली, आईजीआरएस पोर्टल, मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल और शिवगढ़ के खंड विकास अधिकारी तक लिखित शिकायत दर्ज कराई। लेकिन हैरत की बात यह है कि इतनी चौतरफा शिकायतों के बावजूद अब तक शासन-प्रशासन की ओर से मौके पर कोई ठोस जांच दल नहीं पहुंचा।
आरोप एवं कानूनी पक्ष: इस खबर में निर्माण कार्य की गुणवत्ता, सामग्री के स्तर, वित्तीय अनियमितता और ठेकेदार द्वारा दी गई कथित धमकी से जुड़े सभी तथ्य शिकायतकर्ता अरविंद मौर्य द्वारा प्रस्तुत **लिखित शिकायत और लगाए गए आरोपों** पर आधारित हैं। इन सभी बिंदुओं की आधिकारिक सत्यता और कानूनी पुष्टि विभागीय जांच व लैब टेस्ट की अंतिम रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
तकनीकी टीम से लैब जांच की मांग, क्या होगी दोषियों पर सख्त कार्रवाई?
शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर मांग की है कि तत्काल प्रभाव से एक निष्पक्ष तकनीकी टीम को मौके पर भेजा जाए और निर्माण सामग्री के नमूनों की जांच लैब के माध्यम से कराई जाए। साथ ही, सरकारी धन का डाका डालने वाले दोषी ठेकेदार के खिलाफ कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई हो और कार्य की गुणवत्ता सुरक्षित की जाए। अब देखना यह होगा कि रायबरेली प्रशासन इस बड़े घोटाले पर क्या एक्शन लेता है या फिर रसूखदार ठेकेदार के आगे जांच ठंडे बस्ते में चली जाएगी!



