देवभूमि की हरियाली पर डाका डालने वाले माफिया और आरा मशीन स्वामी पर वन विभाग का करारा प्रहार: काशीपुर की आरा मशीन से सागौन के 10 नग बरामद, एफआईआर दर्ज

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देवभूमि की हरियाली पर डाका डालने वाले माफिया और आरा मशीन स्वामी पर वन विभाग का करारा प्रहार: काशीपुर की आरा मशीन से सागौन के 10 नग बरामद, एफआईआर दर्ज

 

सलीम अहमद साहिल / अज़हर मलिक 

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रामनगर: देवभूमि उत्तराखंड की अलौकिक प्राकृतिक सुंदरता, घने जंगलों और पर्यावरण को तरक्की व लालच की आड़ में बदसूरत बनाने वाले वन तस्करों और आरा मशीन स्वामियों के नापाक गठजोड़ पर रामनगर वन प्रभाग ने करारा प्रहार किया है। जंगलों को छलनी कर प्राकृतिक संतुलन को तबाही की कगार पर धकेलने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 18 अक्टूबर 2026 की सुबह लगभग 09:00 बजे एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया गया। रामनगर रेंज के आमपानी बीट में सागौन के 02 हरे-भरे विशालकाय पेड़ों के अवैध कटान की खबर मिलते ही रामनगर रेंजर शेखर तिवारी ने बिना एक पल गंवाए अपनी असाधारण कार्यकुशलता और आक्रामक रणनीति का परिचय दिया। रेंजर शेखर तिवारी के सटीक और कठोर दिशा-निर्देशों के चलते वन विभाग की टीम ने तत्काल जाल बिछाया। जैसे ही गोपनीय पक्की सूचना मिली कि जंगल से चोरी-छिपे काटे गए इन कीमती पेड़ों को ठिकाने लगाने और चिरान के लिए बाजपुर रोड, द्रोणा सागर (काशीपुर) स्थित शिवम कुमार शर्मा की आरा मशीन पर छुपाकर रखा गया है, रेंजर के नेतृत्व में विशेष धावा दल ने मौके पर सीधे धावा बोल दिया।

 

 

छापेमारी के दौरान आरा मशीन परिसर का नज़ारा वन माफिया और आरा मशीन स्वामी के बीच चल रहे काले कारोबार की चुगली कर रहा था। टीम ने मौके से सागौन के 10 बड़े अवैध प्रकाष्ठ बरामद कर अपनी अभिरक्षा में ले लिए और पूरी खेप को जब्त कर रामनगर रेंज परिसर पहुँचाया। इस निर्भीक और त्वरित कार्रवाई को अंजाम देने वाली टीम में वन दरोगा वीरेंद्र प्रसाद पाण्डेय, मोहम्मद इमरान, अजमत खान, नरेश चन्द्र, वनरक्षक आशुतोष कुमार, वाहन चालक मनोज तिवारी एवं अन्य सहयोगी वन कर्मचारी शामिल रहे। रेंजर शेखर तिवारी के सख्त रवैये और पूरी टीम की मुस्तैदी ने प्राकृतिक संपदा पर डाका डालने वालों की नींद उड़ा दी है।

 

 

 

प्रकरण में जंगलों की हरियाली को निगलने वाले तस्करों के साथ-साथ अवैध लकड़ी को पनाह देने वाले आरा मशीन स्वामी शिवम कुमार शर्मा के खिलाफ वन अधिनियम की संगीन धाराओं में मुकदमा कायम कर लिया गया है। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि उत्तराखंड की खूबसूरती और हरियाली पर दाग लगाने वाले ऐसे आरा मशीन स्वामियों पर प्रशासन का चाबुक कब चलेगा? चंद रुपयों के लालच में तस्करों को शह देकर प्रदेश के पर्यावरण को बर्बाद करने वाली ऐसी आरा मशीनों पर आखिर कब प्रशासन का बुलडोजर गरजेगा या जेसीबी से इसे जमींदोज किया जाएगा? अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या वन विभाग और शासन इस आरा मशीन का लाइसेंस हमेशा के लिए रद्द कर इसे हमेशा के लिए सील करेगा, ताकि भविष्य में कोई भी आरा मशीन स्वामी तस्करों का मददगार बनने से पहले सौ बार सोचे।

 

 

 

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