पहाड़ की कठिन डगर पर जनसेवा का जुनून, मानव–वन्यजीव संघर्ष के खिलाफ धरातल पर डटे DFO प्रकाश चंद्र आर्य
सलीम अहमद साहिल / अज़हर मलिक
बागेश्वर। उत्तराखंड में बढ़ता मानव–वन्यजीव संघर्ष आज ग्रामीणों की सुरक्षा, किसानों की आजीविका और शासन-प्रशासन के सामने एक बड़ी चुनौती बन चुका है। कभी खेतों में खड़ी फसलों पर वन्यजीवों का हमला, तो कभी आबादी के आसपास उनकी दस्तक ग्रामीणों की चिंताएं बढ़ा देती है। ऐसी परिस्थितियों में सरकारी योजनाओं की वास्तविक सफलता तभी सुनिश्चित होती है, जब वे कागजों से निकलकर धरातल पर उतरें और उनका लाभ सीधे आम जनता तक पहुंचे। बागेश्वर वन प्रभाग में तैनात प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) प्रकाश चंद्र आर्य की कार्यशैली इसी जिम्मेदारी और जनसेवा के संकल्प की एक सकारात्मक मिसाल पेश कर रही है। ग्रामीणों के बीच पहुंचकर उनकी समस्याएं सुनना, उनकी पीड़ा को समझना और समाधान की दिशा में संवाद स्थापित करना उनकी कार्यप्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता नजर आ रहा है। पहाड़ों की दुर्गम राहें, विषम भौगोलिक परिस्थितियां और मानव–वन्यजीव संघर्ष जैसी जटिल चुनौतियां किसी भी अधिकारी के लिए आसान नहीं हैं, लेकिन जनता की सेवा का जुनून इन मुश्किलों के बीच भी नई राह तलाशने की प्रेरणा देता है। प्रकाश चंद्र आर्य की यह पहल संदेश देती है कि जनसेवा केवल कार्यालयों में बैठकर आदेश जारी करने तक सीमित नहीं, बल्कि जनता के बीच पहुंचकर उनकी वास्तविक समस्याओं को समझने और उनके समाधान के लिए गंभीर प्रयास करने से सार्थक होती है।
इसी क्रम में 18 अक्टूबर 2026 को ग्राम पंचायत पंत क्वेराली में ग्रामीणों के साथ खुली बैठक आयोजित कर DFO प्रकाश चंद्र आर्य ने मानव–वन्यजीव संघर्ष को कम करने की दिशा में जनसंवाद को प्राथमिकता दी। बैठक में ग्रामीणों ने वन्यजीवों के कारण कृषि और फसल उत्पादन में आ रही परेशानियों को साझा किया, जिस पर प्रभागीय वनाधिकारी ने उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना और विभागीय स्तर पर संभावित समाधानों को लेकर विस्तार से चर्चा की। साथ ही जनजागरूकता बढ़ाने, ग्रामीणों की सहभागिता सुनिश्चित करने और वन्यजीवों के साथ सुरक्षित सहअस्तित्व को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया। कार्यक्रम में पूर्व ग्राम प्रधान श्री कैलाश चंद्र पाठक, वन पंचायत सरपंच, ग्रामीणजन और मातृशक्ति की उपस्थिति ने जनसहभागिता के महत्व को रेखांकित किया।
बागेश्वर जैसे पर्वतीय क्षेत्र में वन्यजीव संरक्षण और जनसुरक्षा के बीच संतुलन स्थापित करना एक बड़ी जिम्मेदारी है, जिसके लिए संवेदनशीलता, संवाद और निरंतर धरातलीय प्रयास जरूरी हैं। DFO प्रकाश चंद्र आर्य की यह पहल उनकी जनोन्मुखी कार्यशैली को सामने लाती है और यह भरोसा मजबूत करती है कि ग्रामीणों की आवाज सुनकर ही समस्याओं के व्यावहारिक समाधान की दिशा तैयार की जा सकती है। जनता के बीच पहुंचकर उनकी समस्याओं को समझना, उनकी चिंताओं को प्राथमिकता देना और समाधान की राह तलाशना ही एक जिम्मेदार अधिकारी की असली पहचान है। बागेश्वर वन प्रभाग की यह पहल मानव–वन्यजीव संघर्ष को कम करने, ग्रामीणों में जागरूकता बढ़ाने और वन्यजीव संरक्षण के साथ जनसुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक सराहनीय कदम है।



