मारुति सुजुकी की मनमानी और खराब सेवा के खिलाफ उपभोक्ता ने खोला मोर्चा, जिला उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाते हुए कर्टसी कार की मांग
अज़हर मलिक
काशीपुर में मारुति सुजुकी कंपनी की मनमानी और लचर ग्राहक सेवा का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है, जहाँ वारंटी अवधि के भीतर होने के बावजूद कंपनी ने एक नई गाड़ी का महत्वपूर्ण पार्ट बदलने से साफ इनकार कर दिया है। वार्ड नंबर 35, चामुंडा विहार, काशीपुर निवासी नाजिया करीम ने अपनी मारुति सुजुकी फ्रॉन्क्स (Fronx AMT, पंजीकरण संख्या UK18 U 2613) गत 25 जून 2025 को खरीदी थी, जो वर्तमान में कंपनी की 2 वर्ष या 40,000 किलोमीटर की पूर्ण वारंटी के अंतर्गत पूरी तरह से कवर्ड है। गत 25 सितंबर 2026 को तकनीकी खराबी आने पर जब इस वाहन को काशीपुर स्थित अधिकृत सर्विस सेंटर (आकांक्षा ऑटोमोबाइल) में मरम्मत हेतु दर्ज कराया गया, तो अधिकृत अधिकारी के.के. डिमरी द्वारा गहन निरीक्षण के बाद यह स्पष्ट किया गया कि गाड़ी का रियर एक्सल ट्यूब/बीम (Rear Axle Tube/Beam) पूरी तरह से दोषपूर्ण है और इसे वारंटी के तहत बदला जाना आवश्यक है।
इसके बावजूद कंपनी के अधिकारियों और सर्विस सेंटर प्रबंधन ने अपनी ही तय वारंटी नीति का सरासर उल्लंघन करते हुए इस दोषपूर्ण पार्ट को निःशुल्क बदलने से मना कर दिया, जिससे उपभोक्ता और उनके परिवार को भारी मानसिक तनाव व परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पीड़ित उपभोक्ता प्रतिदिन बच्चों को पढ़ाने के लिए ठाकुरद्वारा आवागमन करती हैं, लेकिन गाड़ी सर्विस सेंटर में खड़ी होने और कंपनी द्वारा समय पर पार्ट न बदलने के कारण उन्हें भयंकर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इस मनमानी से त्रस्त होकर और मारुति सुजुकी के उच्च अधिकारियों तथा टोल फ्री नंबर से कोई संतोषजनक जवाब न मिलने पर उपभोक्ता ने अब जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, रुद्रपुर में औपचारिक शिकायत दर्ज करा दी है। इसके साथ ही कंपनी के उच्च मुख्यालय नई दिल्ली और सर्विस सेंटर को भेजे गए पत्रों के माध्यम से यह मांग भी जोरशोर से उठाई गई है।
कि जब तक उनकी गाड़ी ठीक होकर नहीं मिलती, तब तक उन्हें आने-जाने के लिए कंपनी की तरफ से वैकल्पिक वाहन (Courtesy/Loaner Car) उपलब्ध कराया जाए। सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व फैसलों और कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए उपभोक्ता ने चेतावनी दी है कि यदि कंपनी जल्द से जल्द वारंटी के तहत निःशुल्क पार्ट बदलकर उचित समाधान नहीं करती है, तो उपभोक्ता आयोग के माध्यम से कंपनी पर सेवा में गंभीर कमी और मानसिक-आर्थिक उत्पीड़न का बड़ा कानूनी मुकदमा चलाया जाएगा



