एआरटीओ के नए आदेश से मालधन की 40 हजार आबादी के समक्ष खड़ी हुई गंभीर व्यावहारिक व आर्थिक चुनौतियाँ
अज़हर मलिक
रामनगर के मालधन क्षेत्र में आवागमन को लेकर परिवहन विभाग द्वारा एक नया आदेश जारी किया गया है, जिसके तहत चौधरी ढाबा (NH-309) से मालधन की ओर जाने वाले मार्ग पर 16,200 किलो (16.2 टन) से अधिक सकल भार वाले वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। लोक निर्माण विभाग के निर्माण खंड के मौखिक एवं लिखित तर्कों के आधार पर इस मार्ग को ग्रामीण सड़क (MDR) की श्रेणी में बताते हुए यह कदम उठाया गया है ताकि सड़क की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। हालांकि, इस प्रशासनिक निर्णय से लगभग 30 से 40 हजार की घनी आबादी वाले इस क्षेत्र के सामने कई गंभीर व्यावहारिक और आर्थिक सवाल खड़े हो गए हैं, जिन पर गहराई से विचार करने की आवश्यकता है।
इस आदेश के तार्किक और कानूनी पहलुओं का विश्लेषण करें तो सड़क के बुनियादी ढांचे और सुरक्षा की रक्षा करना प्रशासन का दायित्व है, परंतु किसी भी नीतिगत प्रतिबंध से पहले स्थानीय नागरिकों की मूलभूत आवश्यकताओं का आकलन होना अनिवार्य होता है। वर्तमान आदेश में मालधन क्षेत्र के निवासियों के व्यक्तिगत मकान निर्माण, मरम्मत या अन्य आवश्यक कार्यों के लिए रेता, बजरी, ईंट और सरिया जैसी सामग्रियों के परिवहन हेतु किसी भी प्रकार की वैकल्पिक व्यवस्था, समय-सारणी या स्पष्ट छूट का कोई प्रावधान नहीं किया गया है। भारी वाहनों के अचानक और पूर्ण प्रतिबंध से परिवहन लागत में भारी वृद्धि होगी, जिसका सीधा नकारात्मक प्रभाव स्थानीय नागरिकों के घरेलू बजट और क्षेत्र के छोटे निर्माण कार्यों पर पड़ेगा। इसके साथ ही, इस मार्ग पर रोजगार पाने वाले चालकों और श्रमिकों की आजीविका भी प्रभावित हो रही है।
जनहित और संतुलन की मांग है कि इस प्रकार के प्रतिबंधात्मक आदेशों को लागू करने के साथ-साथ व्यावहारिक समाधान भी निकाले जाएं। उपजिलाधिकारी (SDM) रामनगर और एआरटीओ प्रशासन को इस विषय पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और जनता के साथ संवाद स्थापित करना चाहिए। आवश्यकता इस बात की है कि सड़क के रखरखाव के साथ-साथ आम जनता की दैनिक व घरेलू निर्माण जरूरतों को सुचारू रूप से चलाने के लिए कोई पारदर्शी और व्यावहारिक मार्ग तैयार किया जाए, ताकि सड़क की सुरक्षा भी बनी रहे और 40 हजार की आबादी को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।



