अलहम्दु शरीफ’ क्या है? जानिए इसकी अहमियत और हिंदी में पूरा पाठ
नमाज़ की हर रकअत में पढ़ी जाने वाली यह सूरत क्यों मानी जाती है खासधार्मिक मान्यताओं और इबादत के बीच कुछ दुआएं ऐसी होती हैं, जिनका महत्व हर मुसलमान की जिंदगी में बेहद खास होता है। उन्हीं में से एक है ‘अलहम्दु शरीफ’, जिसे इस्लाम में खास स्थान प्राप्त है।
दरअसल, ‘अलहम्दु शरीफ’ सूरह अल-फ़ातिहा का ही दूसरा नाम है, जो क़ुरआन की पहली सूरत है। यह सूरत हर नमाज़ की शुरुआत में पढ़ी जाती है और इसे इबादत का अहम हिस्सा माना जाता है।
इस सूरत में अल्लाह की तारीफ, उसकी रहमत और इंसान को सही रास्ते पर चलने की दुआ शामिल होती है। यही वजह है कि इसे ‘दुआओं की सूरत’ भी कहा जाता है।
हिंदी में अलहम्दु शरीफ का पाठ:
अल्हम्दु लिल्लाहि रब्बिल आलमीन
अर-रहमानिर-रहीम
मालिकी यौमिद्दीन
इय्याका नअबुदु व इय्याका नस्तईन
इह्दिनस्सिरातल मुस्तक़ीम
सिरातल्लज़ीना अनअम्ता अलैहिम
ग़ैरिल मग़दूबि अलैहिम व लद्दाल्लीन
धार्मिक विद्वानों के अनुसार, इस सूरत को समझकर और ध्यान से पढ़ना इंसान के दिल और सोच पर गहरा असर डालता है। यह न केवल इबादत का हिस्सा है, बल्कि जीवन में सही दिशा दिखाने वाली दुआ भी है।
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