डिप्टी सीएम की नाराजगी के बाद अब कार्रवाई होगी शुरू, डॉ. लईक अहमद प्रकरण में जांच तेज, उच्च स्तर पर कई फाइलें खुलीं -सूत्र, स्वास्थ्य विभाग पर सख्ती के संकेत, लेकिन जमीनी कार्रवाई अब भी अधर में, स्वास्थ्य सिस्टम में बड़े बदलाव के आसार
शानू कुमार ब्यूरो उत्तर प्रदेश
बरेली : जनपद में स्वास्थ्य विभाग से जुड़े चर्चित डॉ. लईक अहमद प्रकरण में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य की नाराजगी और सख्त निर्देशों के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। हालांकि, मामला अब तूल पकड़ चुका है और उच्च स्तर पर विभिन्न पहलुओं को लेकर जांच प्रक्रिया तेज कर दी गई है, जिससे पूरे प्रकरण की गंभीरता और बढ़ गई है।
बैठक में सख्त रुख, दिए गए थे स्पष्ट निर्देश – सूत्र
हाल ही में बरेली दौरे के दौरान डिप्टी सीएम ने विभागीय समीक्षा बैठक में स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष फोकस रखा था। इसी क्रम में डॉ. लईक अहमद से जुड़े प्रकरण पर भी चर्चा हुई, जहां उनकी कार्यशैली और विभागीय कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठे। बैठक में संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि प्राप्त शिकायतों को गंभीरता से लिया जाए और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
*कई बिंदुओं पर जांच, रिकॉर्ड खंगाले जा रहे*
सूत्रों के अनुसार, प्रकरण अब जिला स्तर से आगे बढ़कर उच्च प्रशासनिक स्तर पर जांच के दायरे में है, जहां अलग-अलग पहलुओं की समीक्षा की जा रही है।
इनमें प्रमुख रूप से :
विभागीय कार्यप्रणाली
प्राप्त शिकायतों का निस्तारण
फील्ड स्तर की निगरानी व्यवस्था
जैसे बिंदुओं को शामिल किया गया है। संबंधित रिकॉर्ड और दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है ताकि तथ्यों की स्थिति स्पष्ट हो सके।
*जिला स्तर पर सुस्ती, उठ रहे सवाल*
जहां एक ओर उच्च स्तर पर जांच तेज होती नजर आ रही है, वहीं जिला स्तर पर अब तक किसी ठोस कार्रवाई का अभाव बना हुआ है। इस स्थिति को लेकर यह सवाल उठने लगे हैं कि सख्त निर्देशों के बावजूद कार्रवाई की रफ्तार धीमी क्यों है।
*प्रशासनिक निगरानी में मामला, आगे हो सकती है कार्रवाई*
सूत्रों का कहना है कि पूरा प्रकरण अब प्रशासनिक निगरानी में है और जांच रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी जा रही है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि जांच पूरी होने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है।
हालांकि, प्रकरण से जुड़े सभी आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है और मामला जांच के अधीन है। संबंधित पक्ष का पक्ष सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
वहीं डिप्टी सीएम की नाराजगी, उच्च स्तर पर तेज होती जांच और जिला स्तर पर सुस्त कार्रवाई, इन सबके बीच यह मामला अब प्रशासनिक सिस्टम की कार्यप्रणाली की बड़ी परीक्षा बन गया है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि जांच के निष्कर्ष किस दिशा में जाते हैं और क्या वाकई जमीनी स्तर पर सख्त कार्रवाई देखने को मिलती है।



