ढेला नदी में बेखौफ ‘सिंडिकेट’, ट्रैक्टर-ट्रालियों और फावड़ों के दम पर रात भर उजड़ रहा नदी का स्वरूप।

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ढेला नदी में बेखौफ ‘सिंडिकेट’, ट्रैक्टर-ट्रालियों और फावड़ों के दम पर रात भर उजड़ रहा नदी का स्वरूप।

अज़हर मलिक

काशीपुर के कटोरा ताल चौकी क्षेत्र के अंतर्गत गंगा बाबा रोड पर स्थित ढेला नदी में खनन माफिया बेहद शातिराना और सुनियोजित तरीके से अवैध कारोबार को अंजाम दे रहे हैं। यहाँ किसी बड़े लाव-लश्कर के बजाय दो-तीन ट्रैक्टर-ट्रालियों के छोटे समूह का उपयोग किया जा रहा है, जो देर रात होते ही चुपके से नदी के भीतर प्रवेश कर जाते हैं।

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माफियाओं के गुर्गे फावड़ों की मदद से नदी का सीना चीरकर ट्रालियों को भरते हैं और फिर इस चोरी की गई सामग्री को शहर में चल रहे भराव (भरान) के कार्यों में खपाया जा रहा है। पकड़े जाने के डर से इन वाहनों की नंबर प्लेटों को बेहद चालाकी से छुपा दिया जाता है ताकि किसी भी सूरत में पहचान उजागर न हो सके। हालांकि वाहनों की संख्या कम रखी गई है,

 

 

लेकिन रात भर निरंतर चलने वाला यह सिलसिला इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि माफियाओं को कानून का कोई भय नहीं है। कटोरा ताल चौकी क्षेत्र के इतने करीब चल रहे इस अवैध खेल ने स्थानीय प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारियों की मुस्तैदी पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं, क्योंकि जिस निडरता के साथ ये वाहन नदी के भीतर जाकर अवैध भराव का काम कर रहे हैं, उससे स्पष्ट रूप से जिम्मेदारों के संरक्षण की ओर संकेत मिलता है। यह अवैध कारोबार न केवल प्राकृतिक संपदा की लूट है, बल्कि शासन की नाक के नीचे चल रही व्यवस्था की एक बड़ी नाकामी भी है।

 

 

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