रणजीत रावत की अगुवाई मे रामनगर में गूंजा बाबा साहब का संदेश—समानता, शिक्षा और अधिकार की राह पर बढ़ने का संकल्प।
सलीम अहमद साहिल
रामनगर। कांग्रेस कार्यालय रामनगर में भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर जी की 135वीं जयंती अत्यंत हर्षोल्लास, गरिमा और उत्साह के साथ मनाई गई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों की भागीदारी देखने को मिली, जिससे पूरा वातावरण बाबा साहब के विचारों और उनके आदर्शों से ओत-प्रोत नजर आया।
इस अवसर पर आयोजित गोष्ठी में डॉ. भीमराव अंबेडकर के जीवन संघर्ष, उनके सिद्धांतों और भारतीय संविधान निर्माण में उनके ऐतिहासिक योगदान पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम की शुरुआत बाबा साहब के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। जिसके बाद उपस्थित सभी लोगों ने उनके दिखाए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
पूर्व विधायक रणजीत रावत ने अपने संबोधन में कहा कि बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर शिक्षाविद और महान विद्वान थे उन्होंने कोलंबिया यूनिवर्सिटी अमेरिका और लंदन स्कूल आफ इकोनॉमिक्स से उच्च शिक्षा प्राप्त की और वे बहु-आयामी व्यक्तित्व के धनी और अनेक विषयों के गहन ज्ञाता और असाधारण विद्वान थे। बाबा साहब का जीवन संघर्ष, सत्यनिष्ठा, लगन और वंचित वर्ग के प्रति करुणा का अद्वितीय उदाहरण है। उन्होंने कहा कि अत्यंत कठिन परिस्थितियों में भी डॉ. अंबेडकर ने अपनी शिक्षा पूरी की और समाज के उत्थान के लिए निरंतर कार्य करते रहे। उनका पूरा जीवन हमें विपरीत परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। उनका जीवन हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है, जो विपरीत परिस्थितियों में भी अपने सपनों को साकार करना चाहता है।

जिला महासचिव मो. युसूफ और वरिष्ठ कांग्रेसजन लीलाधर जोशी ने कहा कि बाबा साहब ने भारतीय समाज को समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व का जो संदेश दिया, वह आज भी उतना ही प्रासंगिक है। उन्होंने संविधान के माध्यम से हर नागरिक को समान अधिकार दिलाकर एक नए भारत की नींव रखी।
बाबा साहब की जीवनी पर विशेष प्रकाश:
डॉ. भीमराव अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्यप्रदेश के महू में हुआ था। सामाजिक भेदभाव और आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी की और आगे चलकर कोलंबिया विश्वविद्यालय तथा लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से उच्च शिक्षा प्राप्त की। वे एक महान विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री, समाज सुधारक और दूरदर्शी नेता थे।
उन्होंने अपना पूरा जीवन दलितों, शोषितों और वंचित वर्ग के अधिकारों के लिए समर्पित कर दिया। भारतीय संविधान के मुख्य शिल्पकार के रूप में उन्होंने देश को एक ऐसा मजबूत और समावेशी संविधान दिया, जो सभी नागरिकों को समान अधिकार और न्याय की गारंटी देता है।
बाबा साहब का मानना था कि “शिक्षा ही वह हथियार है जिससे समाज को बदला जा सकता है” और इसी विचारधारा के साथ उन्होंने समाज में जागरूकता और समानता की अलख जगाई। उनका जीवन संघर्ष, आत्मसम्मान और सामाजिक न्याय की लड़ाई का प्रतीक है।
कार्यक्रम में उपस्थित सभी वक्ताओं ने लोगों से आह्वान किया कि वे बाबा साहब के विचारों को अपने जीवन में अपनाएं और समाज में समानता, शिक्षा और अधिकारों की रक्षा के लिए आगे आएं।
कार्यक्रम का सफल संचालन जिला उपाध्यक्ष अनिल अग्रवाल खुलासा ने किया।
बाबा साहब की जयंती पर रामनगर से एक सशक्त संदेश गया—जब तक समाज के अंतिम व्यक्ति को न्याय नहीं मिलेगा, तब तक बाबा साहब का सपना अधूरा रहेगा। यह आयोजन केवल एक जयंती नहीं, बल्कि समानता, अधिकार और संविधान की रक्षा के लिए एक मजबूत संकल्प का प्रतीक बनकर उभरा।
इस दौरान नगर अध्यक्ष महिला कांग्रेस ललिता उपाध्याय, सतेस्वरी रावत, ममता आर्या, लीलाधर जोशी, एड वीरेंद्र सिंह, घनश्याम सिंह, जसीराम, संजय कुमार, महिपाल नेगी, मोहसिन खान, अनीश खान, प्रेम जैन, उमाकांत ध्यानी, राजीव अग्रवाल, रवि ठाकुर, ओम प्रकाश पड़लिया, जावेद खान, कमल नेगी, गिरीश बिष्ट, नजाकत अली, दानिश हुसैन, गोपाल पाण्डेय, मो दानिश, दरबान सिंह, पंकज सुयाल, देव बिष्ट, मान सिंह पाल, मो सोएब, सुमित तिवारी, बाली राम, मोईन खान आदि मौजूद रहे।



