तराई पश्चिमी वन प्रभाग का महाधमाका: सरकारी खजाने में हुई पैसों की ऐतिहासिक बारिश, टूट गए कमाई के सारे पुराने रिकॉर्ड

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तराई पश्चिमी वन प्रभाग का महाधमाका: सरकारी खजाने में हुई पैसों की ऐतिहासिक बारिश, टूट गए कमाई के सारे पुराने रिकॉर्ड! 🔥

🎤 विशेष संवाददाता, रामनगर | 📅 दिनांक: 19 जून 2026
क्या कोई सरकारी महकमा एक ही झटके में अपनी कमाई को दोगुने से भी ज़्यादा बढ़ा सकता है? क्या खनन माफियाओं के अवैध साम्राज्य को ध्वस्त करके ईमानदारी से राजस्व का नया कीर्तिमान स्थापित किया जा सकता है? जी हाँ, उत्तराखंड के तराई पश्चिमी वन प्रभाग ने ठीक ऐसा ही एक अकल्पनीय और हैरतअंगेज कारनामा कर दिखाया है, जिसने पूरे प्रदेश के प्रशासनिक हलकों में तहलका मचा दिया है!

उत्तराखंड के यशस्वी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कुशल नेतृत्व, भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति और वन निगम की अथक कार्यप्रणाली के चलते इस साल सरकारी खजाने में ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है। मुख्यमंत्री धामी की पारदर्शी सोच और वन निगम के कुशल प्रबंधन का ही नतीजा है कि कोसी और दाबका नदी के खनन गेटों पर इस बार राजस्व का ऐसा अभूतपूर्व आंकड़ा सामने आया है, जिसने पिछले सारे वित्तीय वर्षों के रिकॉर्ड को पूरी तरह नेस्तनाबूद कर दिया है।

📊 मोबाइल फ्रेंडली डेटा ग्राफ: पिछले सत्र बनाम वर्तमान सत्र की बेमिसाल छलांग

नीचे दी गई तालिका को विशेष रूप से मोबाइल स्क्रीन के अनुकूल (खाड़ी ग्राफ प्रारूप में) तैयार किया गया है, ताकि पाठक बिना किसी परेशानी के राजस्व में हुई इस भारी बढ़ोतरी को साफ-साफ देख सकें:

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📊 खनन सत्र (वर्ष)🪨 कुल उपखनिज मात्रा (घ.मी.)💰 कुल प्राप्त राजस्व (₹ में)
2024-255,05,053.984,54,54,858.20
2025-26 (वर्तमान)10,87,997.689,79,19,791.20

आंकड़े साफ गवाही दे रहे हैं कि जहां साल 2024-25 में कुल राजस्व महज 4.54 करोड़ रुपये के आसपास सिमट गया था, वहीं इस साल (अक्टूबर 2025 से 19 जून 2026 तक) वन निगम की मुस्तैदी से यह छलांग लगाकर सीधे ₹9,79,19,791.20 (लगभग 9.79 करोड़ रुपये) के ऐतिहासिक शिखर पर पहुंच गया है।

 मुख्यमंत्री धामी की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति: अवैध खनन पर चला वन विभाग का हंटर

इस ऐतिहासिक सफलता की नींव में वन विभाग की वह अभेद्य और बहुस्तरीय निगरानी प्रणाली है, जिसने खनन माफियाओं के हौसले पूरी तरह पस्त कर दिए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सख्त निर्देशों का पालन करते हुए तराई पश्चिमी वन प्रभाग ने पूरे सत्र के दौरान एक पल के लिए भी ढील नहीं दी। राजस्व की इस चोरी को रोकने के लिए विभाग ने चौतरफा घेराबंदी की:

  • संवेदनशील और डेंजर ज़ोन वाले क्षेत्रों में वन विभाग की टीमों द्वारा लगातार चौबीसों घंटे विशेष गश्त की गई।
  • निकासी गेटों पर अधिकारियों द्वारा अचानक आकस्मिक निरीक्षण और रात्रिकालीन सघन चेकिंग अभियान चलाए गए।
  • अवैध परिवहन को रोकने के लिए गेटों पर सभी वाहनों के प्रपत्रों और दस्तावेजों का कड़ाई से भौतिक सत्यापन किया गया।
⚡ माफियाओं के खिलाफ महाअभियान: दर्जनों वाहन सीज, सरकारी खजाने की हुई सुरक्षा

इस पूरे सत्र में वन विभाग द्वारा अवैध खनन, अवैध परिवहन और निर्धारित सीमा से बाहर जाकर अवैध रूप से उपखनिज निकालने वालों के खिलाफ एक व्यापक युद्ध स्तर पर अभियान चलाया गया। इस सख्त कार्रवाई के दौरान नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले अनेक वाहनों को मौके पर ही सीज कर दिया गया और संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कानूनी कार्रवाई अमल में लाई गई।

नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित होने के कारण ही उपखनिज का परिवहन केवल वैध प्रपत्रों के आधार पर तय सीमा के भीतर ही संभव हो सका। परिणाम स्वरूप, राजस्व की होने वाली हर छोटी-बड़ी चोरी और लीकेज को पूरी तरह से बंद कर दिया गया, जिससे सरकार को मिलने वाले इस राजस्व संग्रह में यह ऐतिहासिक और गौरवशाली वृद्धि दर्ज हो सकी है।

 

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