वन विभाग की ताबड़तोड़ कार्रवाई: सागौन तस्करों के सिंडिकेट का भंडाफोड़, हड़कंप!
तराई पश्चिमी वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) प्रकाश चंद्र आर्य के कड़े और कुशल निर्देशन ने एक बार फिर वन माफियाओं की कमर तोड़ कर रख दी है। डीएफओ प्रकाश चंद्र आर्य की पैनी नजर और अचूक रणनीति के आगे शातिर से शातिर अपराधी भी पस्त होते नजर आ रहे हैं। उनके नेतृत्व में रामनगर रेंज और वन सुरक्षा दल की संयुक्त टीम ने आधी रात को काल बनकर वन अपराधियों के उस खौफनाक नेटवर्क पर प्रहार किया, जो लंबे समय से जंगलों का सीना चीरकर हरे-भरे पेड़ों का कत्लेआम कर रहे थे। वन विभाग की इस अचानक और आक्रामक कार्रवाई से पूरे क्षेत्र के लकड़ी तस्करों और वन माफियाओं के हौसले पस्त हो गए हैं और उनके साम्राज्य में पूरी तरह हड़कंप मच गया है।
घेराबंदी के दौरान टीम ने वन अपराध में संलिप्त एक छोटा हाथी वाहन को सागौन के भारी-भरकम 04 गिल्टों के साथ रंगे हाथों दबोच लिया। इसके साथ ही तस्करों के इस काले धंधे में इस्तेमाल होने वाली एक हीरो मोटरसाइकिल को भी टीम ने अपने कब्जे में ले लिया। मौके से तीन दुर्दांत वन अपराधियों को दबोचकर जब वन विभाग के अधिकारियों ने अपने तीखे तेवरों के साथ पूछताछ शुरू की, तो अपराधियों ने टूटकर अपने नेटवर्क के ऐसे-ऐसे राज उगले जिससे अधिकारी भी दंग रह गए। पकड़े गए शातिर अपराधियों की निशानदेही पर काशीपुर रेंज के अंतर्गत आने वाले ग्राम लक्ष्मीपुर लच्छी में एक बेहद खौफनाक और सुनियोजित ठिकाने पर छापेमारी की गई, जहां भूसे के विशाल ढेर के भीतर कफन की तरह छिपाकर रखे गए सागौन प्रकाष्ठ के 11 और नग बरामद किए गए।
माफियाओं के इस काले साम्राज्य से बरामद किए गए समस्त सागौन प्रकाष्ठ को तुरंत वन अभिरक्षा के क्रूर शिकंजे में ले लिया गया और भारी सुरक्षा के बीच एक प्राइवेट ट्रैक्टर-ट्रॉली के माध्यम से कठियापुल चौकी परिसर में लाकर कैद कर दिया गया। अपराध में प्रयुक्त छोटा हाथी और मोटरसाइकिल को भी सीज कर विधिक पिंजरे में डाल दिया गया है। चौंकाने वाला सच यह भी सामने आया है कि ये गिरफ्तार अभियुक्त कोई नौसिखिए नहीं, बल्कि वन विभाग के रिकॉर्ड में दर्ज बेहद शातिर और खूंखार प्रवृत्ति के अपराधी हैं, जो लंबे समय से कानून की आंखों में धूल झोंककर जंगलों को खोखला कर रहे थे और जिनकी तलाश में वन विभाग काफी समय से भटक रहा था।
कानून का खौफ दिखाते हुए गिरफ्तार किए गए तीनों शातिर अभियुक्तों को बिना कोई ढील दिए माननीय न्यायालय के समक्ष पेश किया गया, जहां से उनके गुनाहों की संगीनता को देखते हुए उन्हें सलाखों के पीछे हल्द्वानी कारागार के अंधेरे में भेज दिया गया है। इस पूरे सिंडिकेट को नेस्तनाबूद करने के लिए भारतीय वन अधिनियम, 1927 और अन्य कठोर विधिक प्रावधानों के तहत ऐसी सख्त कार्रवाई की जा रही है, जो भविष्य में किसी भी वन तस्कर की रूह कंपा देने के लिए काफी होगी।



