टोल टैक्स पर अंधेरे का कब्ज़ा, जिम्मेदार कौन? जगतपुर पट्टी टोल पर बंद पड़ी हाई-मास्ट लाइटें किसी बड़े हादसे का इंतज़ार कर रही हैं।
सलीम अहमद साहिल
जसपुर (उधम सिंह नगर- यात्रियों की सुरक्षा के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर बनाई गई फोर-लेन सड़क और टोल प्लाज़ा पर आज अंधेरे का साम्राज्य नजर आ रहा है। जसपुर तहसील के अंतर्गत स्थित जगतपुर पट्टी टोल प्लाज़ा पर रात में उजाला देने के लिए लगाई गई कई हाई-मास्ट और अन्य प्रकाश व्यवस्था लंबे समय से बंद पड़ी बताई जा रही है। जहां कभी रोशनी और सुरक्षा का एहसास होता था, वहां अब ऐसा अंधेरा पसरा है कि राहगीरों और वाहन चालकों के लिए खतरा बढ़ गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि रात के समय टोल प्लाज़ा के आसपास बड़ी संख्या में वाहन खड़े रहते हैं। खराब प्रकाश व्यवस्था के कारण सड़क किनारे खड़े वाहन समय रहते दिखाई नहीं देते। कई बार छोटे वाहन दुर्घटना का शिकार होने से बाल-बाल बचे हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई तो यहां किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर टोल प्लाज़ा पर तैनात अधिकारी और कर्मचारी इन बंद पड़ी लाइटों को क्यों नहीं देख पा रहे हैं? क्या उन्हें यात्रियों की सुरक्षा से कोई सरोकार नहीं है? क्या किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही जिम्मेदारों की नींद खुलेगी?
टोल प्लाज़ा पर प्रकाश व्यवस्था बनाए रखना संबंधित टोल संचालक (Concessionaire/ऑपरेटिंग कंपनी) की जिम्मेदारी होती है। यदि यह परियोजना NHAI के अधीन संचालित है, तो परियोजना की निगरानी करने वाले अधिकारी का भी दायित्व है कि सुरक्षा संबंधी कमियों को तत्काल दूर कराया जाए। ऐसे में यदि लंबे समय तक लाइटें बंद रहती हैं, तो यह केवल तकनीकी खराबी नहीं बल्कि सुरक्षा के प्रति गंभीर लापरवाही मानी जा सकती है।
अब सवाल यह भी उठता है कि यदि अंधेरे की वजह से कोई सड़क दुर्घटना होती है, किसी की जान जाती है या कोई गंभीर रूप से घायल होता है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या टोल संचालक, टोल प्रबंधन और संबंधित परियोजना अधिकारी इस जवाबदेही से बच सकते हैं? सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना उनकी जिम्मेदारी है और ऐसी स्थिति में जांच के आधार पर उनकी जवाबदेही तय की जा सकती है।
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि टोल प्लाज़ा की बंद पड़ी सभी लाइटों को तत्काल चालू कराया जाए और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। यदि समय रहते इस गंभीर समस्या का समाधान नहीं किया गया और भविष्य में कोई दुर्घटना होती है, तो उसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों और टोल प्रबंधन की भूमिका पर गंभीर सवाल उठना स्वाभाविक होगा।
अब देखने वाली बात यह होगी कि जिम्मेदार अधिकारी इस खबर के बाद जागते हैं या फिर किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जाएगा।



