आयुष्मान में लापरवाही पर प्रभार से हटाए गए डॉ. राकेश, डॉ अमित कुमार को सौंपा प्रभार, प्रशासनिक फेरबदल, डॉ. लईक अहमद को 49 बेड पंजीकरण की कमान, डॉ. सुचिता गंगवार संभालेंगी झोलाछाप नियंत्रण, नोडल अधिकारी बदले, अस्पताल पंजीकरण से लेकर शिकायत निस्तारण तक नई जिम्मेदारियां तय

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आयुष्मान में लापरवाही पर प्रभार से हटाए गए डॉ. राकेश, डॉ अमित कुमार को सौंपा प्रभार, प्रशासनिक फेरबदल, डॉ. लईक अहमद को 49 बेड पंजीकरण की कमान, डॉ. सुचिता गंगवार संभालेंगी झोलाछाप नियंत्रण, नोडल अधिकारी बदले, अस्पताल पंजीकरण से लेकर शिकायत निस्तारण तक नई जिम्मेदारियां तय

शानू कुमार ब्यूरो उत्तर प्रदेश 

बरेली : स्वास्थ्य विभाग में प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से सीएमओ डॉ विश्राम सिंह ने कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों और शाखाओं के नोडल अधिकारियों में बड़ा फेरबदल किया है। जानकारी के मुताबिक आयुष्मान भारत योजना, निजी अस्पतालों के पंजीकरण, अल्ट्रासाउंड सेंटरों की निगरानी, फायर एंड सेफ्टी, झोलाछाप चिकित्सकों पर कार्रवाई और आईजीआरएस शिकायतों के निस्तारण सहित कई अहम जिम्मेदारियां नए अधिकारियों को सौंपी गई हैं। विभाग के इस फैसले को कार्यों में पारदर्शिता, जवाबदेही और बेहतर मॉनिटरिंग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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नई व्यवस्था के तहत डिप्टी सीएमओ डॉ. अमित कुमार को आयुष्मान भारत योजना का नोडल अधिकारी बनाया गया है। आयुष्मान योजना का प्रभार पहले डॉ. राकेश के पास था, जिसे अब बदलकर डॉ. अमित कुमार को सौंप दिया गया है। इसके अलावा डॉ. अमित कुमार को अल्ट्रासाउंड सेंटरों के पंजीकरण तथा फायर एंड सेफ्टी से जुड़े कार्यों की जिम्मेदारी भी दी गई है।

 

 

 

वहीं अब डिप्टी सीएमओ डॉ. लईक अहमद को 49 बेड तक की क्षमता वाले निजी अस्पतालों के पंजीकरण का प्रभारी बनाया गया है। अब इस श्रेणी के अस्पतालों के पंजीकरण और संबंधित प्रक्रियाओं की निगरानी उनके अधीन होगी।

 

 

इसके साथ ही डॉ. राकेश को 50 बेड से अधिक क्षमता वाले निजी अस्पतालों के पंजीकरण की जिम्मेदारी सौंपी गई है। बड़े निजी अस्पतालों के पंजीकरण और नियामकीय प्रक्रिया की निगरानी अब उनके जिम्मे रहेगी।

 

 

वहीं डॉ. सुचिता गंगवार को झोलाछाप चिकित्सकों के खिलाफ अभियान, अवैध चिकित्सा गतिविधियों पर नियंत्रण का प्रभारी बनाया गया है। विभाग को उम्मीद है कि इससे शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण के साथ-साथ झोलाछाप चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई और अधिक प्रभावी होगी।

 

 

 

स्वास्थ्य विभाग में हुए इस व्यापक प्रशासनिक फेरबदल के बाद अधिकारियों के कार्यक्षेत्र स्पष्ट रूप से निर्धारित कर दिए गए हैं। माना जा रहा है कि इससे आयुष्मान भारत योजना के संचालन, अस्पतालों के पंजीकरण, अल्ट्रासाउंड सेंटरों की निगरानी, झोलाछाप चिकित्सकों पर कार्रवाई और जनशिकायतों के निस्तारण में तेजी आएगी तथा विभागीय कार्यप्रणाली और अधिक जवाबदेह एवं व्यवस्थित होगी।

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