कागज़ों में सुरक्षित, भीतर से अलग: बरेली पीलीभीत बाईपास के निजी अस्पताल में अनियमितताओं की भरमार, पत्रकार से बदसलूकी ने खोली पोल

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कागज़ों में सुरक्षित, भीतर से अलग: बरेली पीलीभीत बाईपास के निजी अस्पताल में अनियमितताओं की भरमार, पत्रकार से बदसलूकी ने खोली पोल

शानू कुमार ब्यूरो उत्तर प्रदेश 

बरेली (The Great News Special Report): पीलीभीत बाईपास पर स्थित ‘आला हजरत सर्जिकल एंड ट्रामा सेंटर’ अस्पताल इन दिनों सवालों के कठघरे में है। बाहर से चमचमाती इमारत और भीतर हाई-फाई सुविधाओं का दावा करने वाला यह अस्पताल अब नियमों, सुरक्षा और नैतिकता—तीनों के गंभीर उल्लंघन के आरोपों में घिरता नजर आ रहा है। अस्पताल प्रबंधन की मनमानी और प्रशासन की चुप्पी ने पूरे सिस्टम पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

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फायर एनओसी पर सवाल, फिर भी मरीज भर्ती—किसकी अनुमति से चल रहा अस्पताल?

सूत्रों के अनुसार अस्पताल की फायर एनओसी लंबे समय से समाप्त हो चुकी है, इसके बावजूद सैकड़ों मरीजों का इलाज जारी है। फायर सेफ्टी जैसे बुनियादी मानक पूरे न होना सीधे-सीधे मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ है। सवाल यह है कि बिना वैध एनओसी के अस्पताल संचालन की जानकारी होने के बावजूद जिम्मेदार विभाग कार्रवाई से क्यों बच रहे हैं?

 

 

पैथोलॉजी लैब पर संदेह—नाम किसी का, काम किसी और काअस्पताल परिसर में संचालित पैथोलॉजी लैब को लेकर भी गंभीर अनियमितताओं की चर्चा है। बताया जा रहा है कि लैब जिस डॉक्टर के नाम पर पंजीकृत है, वह नियमित रूप से मौजूद नहीं रहते। ऐसे में जांच रिपोर्टों की विश्वसनीयता और मरीजों के इलाज की गुणवत्ता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लग गया है।

रेफरल सिस्टम या कमीशन रैकेट?

स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि कुछ एंबुलेंस और बिचौलियों के जरिए मरीजों को सीधे इसी अस्पताल में लाया जाता है। क्या यह महज संयोग है या फिर सुनियोजित ‘रेफरल सिस्टम’? अगर कमीशन के आधार पर मरीजों को लाया जा रहा है तो यह चिकित्सा नैतिकता का खुला उल्लंघन माना जाएगा।

 

 

बायो-मेडिकल वेस्ट बना खतरा—नगर निगम की चुप्पी क्यों?

 

 

सूत्रों के मुताबिक अस्पताल से निकलने वाले बायो-मेडिकल कचरे के निस्तारण को लेकर भी गंभीर आरोप हैं, कहा जा रहा है कि निर्धारित नियमों के विपरीत संक्रमित कचरे को नालों में बहाया जा रहा है। यदि यह सच है, तो यह केवल नियम उल्लंघन नहीं बल्कि पूरे शहर के स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा है।

 

 

पत्रकार से अभद्रता या सच दबाने की कोशिश?

 

इन तमाम सवालों के बीच एक पत्रकार के साथ हुई अभद्रता की घटना ने मामले को और गंभीर बना दिया है। इसे अस्पताल प्रबंधन की झुंझलाहट या संभावित अनियमितताओं के उजागर होने का डर माना जा रहा है।

 

 

अब निगाहें प्रशासन पर जनता यह जानना चाहती है कि क्या जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, फायर विभाग और नगर निगम इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कराएंगे या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।

 

 

The Great News की मांग है कि अस्पताल की सभी एनओसी, लैब रजिस्ट्रेशन और वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम की तत्काल उच्चस्तरीय जांच हो, ताकि सच सामने आ सके और जनता का भरोसा बहाल हो।

 

 

 

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