यूपी में दवा घोटाले का बड़ा खुलासा: सेना और सरकारी अस्पतालों की दवाएं निजी गोदाम में मिलीं, एक्सपायरी डेट बदलकर बेचने का आरोप
आगरा में छापेमारी के बाद बड़ा खुलासा, पूरे प्रदेश में जांच शुरू
उत्तर प्रदेश में सरकारी अस्पतालों और सेना के लिए भेजी जाने वाली दवाओं से जुड़े बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। आगरा में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग (FSDA) की छापेमारी में निजी गोदामों से भारी मात्रा में सरकारी सप्लाई और सैन्य उपयोग की दवाएं बरामद हुई हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि एक्सपायर हो चुकी इंसुलिन और अन्य दवाओं की तारीख मिटाकर उन पर नई एक्सपायरी डेट डालकर बाजार में बेचा जा रहा था।
इस सनसनीखेज खुलासे के बाद आगरा, अलीगढ़ और रुड़की से मिले इनपुट के आधार पर पूरे प्रदेश में जांच अभियान शुरू कर दिया गया है।
सरकारी दवाओं का रास्ते में बदल दिया जाता था पैकेट
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के सहायक आयुक्त ब्रजेश कुमार यादव के नेतृत्व में विशेष टीम ने आगरा में लगातार तीन दिन तक जांच की। जांच में सामने आया कि सरकारी अस्पतालों के लिए भेजी जाने वाली दवाओं के पैकेट बीच रास्ते में बदल दिए जाते थे।
सूत्रों के अनुसार —
- असली कंपनी की दवाएं निजी गोदाम में भेज दी जाती थीं
- घटिया या दूसरी दवाएं सरकारी अस्पतालों तक पहुंचा दी जाती थीं
- बाद में असली दवाओं को फर्जी बिल के जरिए अलग-अलग मेडिकल स्टोरों पर सप्लाई किया जाता था
जांच में ईएसआई सप्लाई, सेंट्रल गवर्नमेंट सप्लाई और सैन्य उपयोग की दवाएं भी बरामद हुई हैं।
एक्सपायर इंसुलिन पर चढ़ा देते थे नई तारीख
छापेमारी के दौरान सबसे चौंकाने वाला खुलासा एक्सपायर इंसुलिन और रैबीज इंजेक्शन को लेकर हुआ।
जांच टीम के मुताबिक —
- एक्सपायर हो चुकी इंसुलिन को इकट्ठा किया जाता था
- उसकी पुरानी एक्सपायरी डेट मिटा दी जाती थी
- फिर उस पर नई तारीख डालकर दोबारा बाजार में भेजा जाता था
- इन दवाओं को खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों के मेडिकल स्टोरों पर सप्लाई किया जाता था
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह की दवाएं मरीजों की जान के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती हैं।
डेढ़ करोड़ की दवाएं जब्त, 30 कंपनियों को नोटिस
आगरा के फव्वारा स्थित झूलेलाल बाजार में स्थित अवैध गोदाम से करीब डेढ़ करोड़ रुपये की दवाएं जब्त की गई हैं। इनमें देश-विदेश की 30 नामी कंपनियों की 150 से ज्यादा प्रकार की दवाएं शामिल हैं।
बरामद दवाओं में —
- एंटीबायोटिक
- मधुमेह की दवाएं
- थायराइड मेडिसिन
- हृदय रोग की दवाएं
- पेट रोग से जुड़ी दवाएं
शामिल बताई गई हैं।
औषधि विभाग ने सभी कंपनियों को नोटिस जारी कर रिकॉर्ड तलब किए हैं। अब तक करीब ढाई करोड़ रुपये की दवाएं जब्त की जा चुकी हैं।
मुख्य फर्म और गोदाम सील
जांच के दौरान ज्योति ड्रग हाउस और उससे जुड़े दो अवैध गोदामों को सील कर दिया गया है। पुलिस की मौजूदगी में गोदाम खोलकर 37 बोरों में भरी दवाओं को जब्त किया गया।
दवाओं के 10 नमूनों को जांच के लिए लैब भेजा गया है। अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
दो एफआईआर दर्ज, कई आरोपी जांच के घेरे में
इस मामले में ज्योति ड्रग हाउस के मालिक नारायण दास हंसराजानी के खिलाफ आगरा के कोतवाली थाने में दो एफआईआर दर्ज की गई हैं। एक मामले में उनके कर्मचारी पुनीत कटारा को भी आरोपी बनाया गया है।
जांच में यह भी सामने आया कि गोदाम कर्मचारी किशोर मेहता के नाम पर किराए पर लिया गया था।
मेडिकल सप्लाई कॉर्पोरेशन ने मांगी रिपोर्ट
Uttar Pradesh Medical Supplies Corporation के प्रबंध निदेशक डॉ. उज्जवल कुमार ने कहा कि कॉर्पोरेशन की जिम्मेदारी दवाओं को वेयरहाउस तक पहुंचाने की होती है।
उन्होंने कहा कि फिलहाल FSDA की ओर से औपचारिक जानकारी नहीं मिली है, लेकिन पूरा विवरण मंगाकर जांच कराई जाएगी।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
इस पूरे मामले ने उत्तर प्रदेश की दवा सप्लाई व्यवस्था और सरकारी निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सेना, सरकारी अस्पतालों और गरीब मरीजों के लिए भेजी जाने वाली दवाओं में इस तरह की कथित हेराफेरी ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।
अब देखना होगा कि जांच एजेंसियां इस घोटाले की जड़ तक पहुंच पाती हैं या नहीं, और मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वालों पर कितनी सख्त कार्रवाई होती है।



