Bihar News: तालाब में डूबने से 11 वर्षीय छात्र की मौत, अस्पताल में डॉक्टर न मिलने पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा
सारण के मशरक में दर्दनाक हादसा, स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
बिहार के सारण जिले के मशरक प्रखंड से एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है। पचखंडा गांव में तालाब में डूबने से केंद्रीय विद्यालय के 11 वर्षीय छात्र मनीष कुमार की मौत हो गई। हादसे के बाद इलाज के लिए बच्चे को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) ले जाया गया, लेकिन वहां डॉक्टर के मौजूद न होने से ग्रामीणों का गुस्सा भड़क उठा। आक्रोशित लोगों ने सड़क जाम कर स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया।
मृतक मनीष कुमार, पचखंडा गांव निवासी मंटू शर्मा का पुत्र था और मशरक स्थित केंद्रीय विद्यालय में चौथी कक्षा में पढ़ता था। घटना के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है और परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।
खेलते-खेलते तालाब में डूबा मासूम
स्थानीय लोगों के मुताबिक, मनीष गांव के अन्य बच्चों के साथ खेलते हुए चंवर स्थित तालाब के पास पहुंचा था। वहां कुछ बच्चे स्नान कर रहे थे। इसी दौरान मनीष गहरे पानी में चला गया और डूबने लगा। बच्चों के शोर मचाने पर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और काफी मशक्कत के बाद उसे पानी से बाहर निकाला गया।
घटना की सूचना मिलते ही डायल-112 पुलिस टीम बच्चे को लेकर तुरंत सीएचसी मशरक पहुंची, लेकिन अस्पताल में कोई एमबीबीएस डॉक्टर मौजूद नहीं था। समय पर इलाज नहीं मिलने से परिजनों और ग्रामीणों में भारी नाराजगी फैल गई।
अस्पताल परिसर में हंगामा, स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ नारेबाजी
डॉक्टरों की अनुपस्थिति से नाराज ग्रामीणों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया और स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। लोगों का आरोप है कि सीएचसी मशरक में चिकित्सकों की कमी और लापरवाही की शिकायतें पहले भी कई बार सामने आ चुकी हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि आपातकालीन स्थिति में भी मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता। घटना के समय अस्पताल में केवल राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) से जुड़े आयुष चिकित्सक की ड्यूटी बताई जा रही थी।
सड़क जाम कर किया प्रदर्शन
घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने सड़क जाम कर करीब एक घंटे तक प्रदर्शन किया, जिससे यातायात प्रभावित रहा। लोगों ने आरोप लगाया कि जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव द्वारा जारी शिफ्टवार ड्यूटी रोस्टर के बावजूद अस्पताल में नियमित डॉक्टरों की तैनाती सुनिश्चित नहीं की गई।
सूचना मिलने पर मशरक थाना पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों को समझाकर शांत कराया। थानाध्यक्ष अश्विनी कुमार तिवारी ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया जाएगा।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर फिर उठे गंभीर सवाल
इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल दी है। सवाल यह उठ रहा है कि यदि समय पर डॉक्टर उपलब्ध होते तो क्या मासूम मनीष की जान बचाई जा सकती थी? फिलहाल पूरे इलाके में घटना को लेकर गहरा आक्रोश और शोक का माहौल है।



