कुदरत के आगे बेबस जिंदगी: रसुवा में उफनती नदी ने छीना संपर्क, 50 सैलानियों के सांसों की अटकी डोर तो उजड़ते आशियानों के बीच लापता पुलिसकर्मियों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल

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कुदरत के आगे बेबस जिंदगी: रसुवा में उफनती नदी ने छीना संपर्क, 50 सैलानियों के सांसों की अटकी डोर तो उजड़ते आशियानों के बीच लापता पुलिसकर्मियों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल

​नेपाल के रसुवा जिले में तबाही बनकर बरसी बाढ़ ने इंसानी बेबसी और कुदरत के खौफनाक रूप को एक साथ खड़ा कर दिया है। कैलाश मानसरोवर की पवित्र यात्रा पर निकले 50 श्रद्धालुओं और पर्यटकों का अब तक कोई अता-पता नहीं चला है, जिससे उनके परिवारों में कोहराम मचा हुआ है। अपनों की सलामती की आस में हर बीतता पल उनके लिए किसी बड़ी आजमाइश से कम नहीं है। बॉर्डर पर आए इस जलप्रलय ने न केवल रास्तों को निगल लिया है, बल्कि परिजनों के दिलों को भी अनहोनी की आशंका से छलनी कर दिया है।

​जिंदगी और मौत के इस भयानक मंजर के बीच 40 भारतीय मूल के अमेरिकी व कनाडाई पर्यटक और 10 स्थानीय नेपाली नागरिक बाढ़ के भीषण बहाव में फंस गए। अचानक आई तबाही के कारण टेलीफोन नेटवर्क ध्वस्त हो चुके हैं और सड़कें ताश के पत्तों की तरह ढह गई हैं। सुदूर पहाड़ों में फंसे इन लोगों के भूखे-प्यासे होने की आशंका है, जबकि दूर अपने घरों में बैठे उनके अपने हर बजती घंटी के साथ किसी चमत्कार की दुआ मांग रहे हैं।

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​दूसरी तरफ, सुरक्षा और मदद की पहली उम्मीद बनने वाले नेपाल पुलिस के जवानों पर भी यह आपदा कहर बनकर टूटी है। बाढ़ की चपेट में आने से 100 पुलिसकर्मियों के लापता होने की दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। दूसरों की जान बचाने का जिम्मा संभालने वाले जवान खुद जब मौत के साए में समा गए, तो उनके पुलिस शिविरों और घरों में मातम पसर गया। अपनों की तस्वीरें सीने से लगाए परिजनों के बहते आंसू इस तबाही की उस दर्दनाक दास्तान को बयां कर रहे हैं जिसे लफ्जों में समेटना मुमकिन नहीं।

​चीख-पुकार और तबाही के इस मंजर के बीच राहत और बचाव कार्य किसी जिंदगी की डोर को थामने की अंतिम कोशिश की तरह जारी हैं। नेपाली सेना और निजी कंपनियों के हेलीकॉप्टरों ने आसमान में परवाज भरकर धुंचे, स्याफ्रुबेसी और मैलुंग जैसे अति-संवेदनशील इलाकों से 12 जिंदगियों को मौत के मुंह से सुरक्षित बाहर निकाला है। हालांकि, उफनती नदियां और टूट चुके हाईवे अब भी बचाव अभियानों के सामने बड़ी चुनौती बने हुए हैं।

​हालात की भयावहता को देखते हुए नेपाल पर्यटन बोर्ड और स्थानीय प्रशासन ने रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, गोरखा और चितवन जैसे प्रभावित इलाकों में पर्यटकों की आवाजाही पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। आपदा प्रभावित नदी मार्गों और राष्ट्रीय राजमार्गों को एहतियातन बंद कर दिया गया है। कुदरत के इस कहर ने पूरे इलाके को एक ऐसे सन्नाटे और खौफ में धकेल दिया है, जहां हर तरफ सिर्फ बहते पानी का शोर और अपनों को खोने का दर्द गूंज रहा है।

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