उधम सिंह नगर: कागजों में अंडरलोड, सड़कों पर ओवरलोड; ‘लिफ्ट एक्सल’ के खेल से धरल्ले से हो रही नियम-कायदों की धज्जियां
अज़हर मलिक
उधम सिंह नगर जिले की सड़कों और राष्ट्रीय राजमार्गों पर इन दिनों खनन व भारी माल ढुलाई में लगे ‘घोड़ा’ डंपर स्वामियों का एक अनूठा और खतरनाक खेल खुलेआम देखने को मिल रहा है। वाहन स्वामी कागजी रिकॉर्ड और चेकिंग के समय खुद को पूरी तरह ‘अंडरलोड’ साबित करने का दावा करते हैं, लेकिन हकीकत में वे अपनी गाड़ियों में क्षमता के बराबर भारी-भरकम माल भरकर लिफ्ट एक्सल के चारों टायरों को हवा में उठा लेते हैं। ऐसा करके वाहन मालिक सामने यह दिखाने का प्रयास करते हैं कि गाड़ी नियमानुसार चल रही है, जबकि वास्तव में कम टायरों पर पूरी क्षमता का भारी वजन टिके होने के कारण यह सीधे तौर पर गंभीर ओवरलोडिंग की श्रेणी में आता है। डीजल की खपत कम करने और टोल टैक्स में हेरफेर करने के इरादे से अपनाई जा रही यह शॉर्टकट तरकीब सड़कों के स्वास्थ्य और आम जनता की सुरक्षा के लिए बेहद खतरनाक साबित हो रही है।
तकनीकी नियमों के अनुसार जब वाहन में उसकी कुल क्षमता के बराबर माल भरा होता है, तो गाड़ी का पूरा वजन समान रूप से बांटने के लिए लिफ्ट एक्सल समेत सभी टायरों का सड़क पर टिकना अनिवार्य होता है। जब चालकों द्वारा यह लिफ्ट टायर हवा में उठा लिए जाते हैं, तो गाड़ी का सारा वजन बाकी बचे पहियों और एक्सल पर आ जाता है, जो कानूनन पूरी तरह अवैध और ओवरलोडिंग का उल्लंघन है। इससे न केवल सड़कों और पुलों की मियाद समय से पहले खत्म हो रही है, बल्कि तेज रफ्तार में अचानक टायर फटने या ब्रेक फेल होने से बड़े सड़क हादसों का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। चालक बेखौफ होकर हवा में उठे टायरों के साथ सड़कों पर फर्राटा भर रहे हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि नियमों को ताक पर रखकर व्यवस्था को चकमा देने की यह चालाकी बेहद योजनाबद्ध तरीके से की जा रही है।
इस पूरे फर्जीवाड़े और खतरनाक ओवरलोडिंग के खेल पर सड़कों पर मुस्तैद रहने वाले जिम्मेदार विभाग के कर्मचारी और अधिकारी पूरी तरह आंखें मूंदे बैठे हैं। जिले की प्रमुख सड़कों और चेकिंग प्वाइंट्स से रोजाना गुजरने वाले इन वाहनों पर कोई प्रभावी अंकुश न लगना कई सवाल खड़े करता है। ऐसा प्रतीत होता है कि या तो जिम्मेदार महकमों के कर्मचारी इस तकनीकी और कानूनी ओवरलोडिंग के अंतर को समझने में नाकाम हैं या फिर इसे पूरी तरह नजरअंदाज कर रहे हैं। बिना सभी पहियों को नीचे गिराए भारी माल ढोने का यह गैर-कानूनी तरीका न केवल सरकारी राजस्व को चपत लगा रहा है, बल्कि राहगीरों के लिए भी हर पल मौत का सबब बना हुआ है, जिस पर तुरंत सख्त कानूनी शिकंजा कसे जाने की नितांत आवश्यकता है।



