₹25 हज़ार के इनामी गैंगस्टर को मुजफ्फरनगर से दबोचकर एसटीएफ ने साबित किया अपना पराक्रम
अज़हर मलिक
देवभूमि उत्तराखंड की शांत फिज़ाओं में ज़हर घोलने और कानून को चुनौती देने की भूल करने वाले अपराधियों को यह भली-भांति समझ लेना चाहिए कि यहाँ ‘खाकी’ का इक़बाल बुलंद था, बुलंद है और हमेशा रहेगा। राज्य की शांति-व्यवस्था में खलल डालने की कोशिश करने वाले तत्वों के खिलाफ चलाए जा रहे निर्णायक अभियान के तहत उत्तराखंड स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने अपने अदम्य साहस, सटीक रणनीति और अभेद्य सूचना तंत्र का लोहा मनवाते हुए एक और बड़ी सफलता दर्ज की है। वर्षों से पुलिस की आंखों में धूल झोंककर फरार चल रहे ₹25,000 के इनामी और कुख्यात गैंगस्टर दिनेश कुमार को एसटीएफ की जाबांज़ टीम ने उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर स्थित थाना छप्पार क्षेत्र से घेरकर गिरफ्तार कर लिया। हरिद्वार जनपद के थाना ज्वालापुर में दर्ज मुकदमा संख्या 671/2023, धारा 2/3 गैंगस्टर एक्ट में वांछित यह अपराधी लगातार अपनी पहचान छुपाकर कानून से भाग रहा था, लेकिन देवभूमि पुलिस की सतर्क निगाहों से उसका बचना नामुमकिन साबित हुआ।
यह सिर्फ एक गिरफ्तारी नहीं, बल्कि उन तमाम अपराधियों के लिए एक सीधा और कड़ा संदेश है जो यह सोचते हैं कि राज्य की सीमाओं से बाहर भागकर वे कानून के शिकंजे से बच सकते हैं। अदालत द्वारा जारी गैर-जमानती वारंट (NBW) और बीएनएसएस की धारा 84 के तहत चल रही कुर्की-उद्घोषणा की कठोर अदालती कार्यवाहियों के बावजूद यह शातिर आरोपी फरारी काट रहा था। ऐसे दुर्दांत अपराधी की मुजफ्फरनगर की सरजमीं पर जाकर घेराबंदी करना और उसे सलाखों के पीछे पहुँचाना, उत्तराखंड एसटीएफ की पेशेवर कार्यकुशलता और ज़ीरो टॉलरेंस नीति का जीवंत प्रमाण है। निरीक्षक एन.के. भट्ट और उपनिरीक्षक विद्या दत्त जोशी के कुशल नेतृत्व में हेड कांस्टेबल सुधीर केसला, अनूप भाटी, प्रमोद कुमार, महेन्द्र नेगी तथा कांस्टेबल कादर खान की जाबांज़ टीम ने जिस फुर्ती और रणनीति से इस ऑपरेशन को अंजाम दिया, उसने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उत्तराखंड पुलिस का नेटवर्क कितना मजबूत और अचूक है।
उत्तराखंड की हसीन और शांत वादियों की अस्मिता से खिलवाड़ करने की इजाज़त किसी भी कीमत पर किसी अपराधी को नहीं दी जाएगी। पुलिस बल की इस तरह की तेज-तर्रार और सटीक कार्यवाहियाँ आम जनता के दिलों में सुरक्षा का अटूट विश्वास जगाती हैं, वहीं अपराध की दुनिया में सिर्फ और सिर्फ खौफ पैदा करती हैं। एसटीएफ की इस बड़ी कामयाबी ने यह पूरी तरह साफ कर दिया है कि अपराधी चाहे पाताल में भी छुप जाए, कानून के लंबे हाथ उसकी गर्दन तक पहुँच ही जाते हैं। जब तक उत्तराखंड पुलिस और उसकी जाबांज़ एसटीएफ सतर्क है, तब तक देवभूमि की शांति पर आंच लाने वाले हर मंसूबे को इसी तरह खाकी के रौब और पराक्रम से नाकाम किया जाता रहेगा।



