पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों पर भड़के खरगे, बोले- ‘किस्तों में जनता की कमाई लूट रही सरकार’
देश में लगातार बढ़ रही पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। Mallikarjun Kharge ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि जनता की कमाई को “किस्तों में लूटा” जा रहा है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें कम होने के बावजूद आम लोगों को राहत देने के बजाय लगातार ईंधन के दाम बढ़ाए जा रहे हैं।
शनिवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार आठ दिनों में तीसरी बार बढ़ोतरी की गई। सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल के दाम में 87 पैसे प्रति लीटर और डीजल में 91 पैसे प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की। पिछले दस दिनों में ईंधन की कीमतों में करीब 5 रुपये प्रति लीटर तक का इजाफा हो चुका है, जिससे आम जनता पर महंगाई का दबाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि देश नेतृत्व संकट से गुजर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब पश्चिम एशिया में तनाव की स्थिति बनी, तब दुनिया के कई देशों ने अपने नागरिकों को राहत दी, लेकिन भारत में भाजपा सरकार लगातार पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाकर लोगों की जेब पर बोझ डाल रही है।
खरगे ने दावा किया कि पेट्रोल कई शहरों में 100 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच चुका है और केंद्र सरकार ईंधन पर हर दिन लगभग 1,000 करोड़ रुपये का टैक्स वसूल रही है। उन्होंने कहा कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें कम थीं, तब भी सरकार ने उसका फायदा जनता तक नहीं पहुंचाया।
Narendra Modi पर निशाना साधते हुए खरगे ने कहा कि चुनाव खत्म होते ही जनता को “त्याग” का संदेश दिया जाने लगा। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर इस “किस्तों वाली लूट” का फायदा किसे मिल रहा है।
खरगे ने कई देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि इटली, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, ब्रिटेन और आयरलैंड जैसे देशों ने ईंधन पर टैक्स घटाकर अपने नागरिकों को राहत दी। उन्होंने दावा किया कि ऑस्ट्रेलिया और जर्मनी जैसे देशों में टैक्स कटौती के चलते पेट्रोल की कीमतों में 17 से 19 रुपये प्रति लीटर तक राहत दी गई।
बता दें कि इससे पहले 15 मई को पेट्रोल और डीजल के दाम में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी। इसके बाद 19 मई को करीब 90 पैसे प्रति लीटर का इजाफा हुआ और अब तीसरी बार कीमतें बढ़ने से आम लोगों की चिंता बढ़ गई है।



