काशीपुर निकाय चुनाव में क्या कांग्रेस अपने सबसे प्रभावशाली चेहरे को नजरअंदाज कर बैठेगी?
अज़हर मलिक
उत्तराखंड में निकाय चुनाव की सरगर्मियां तेज़ हो चुकी हैं। राजनीतिक गलियारों में हलचलें बढ़ रही हैं, और सभी पार्टियां अपने सबसे दमदार उम्मीदवार उतारने की तैयारी में जुटी हैं। लेकिन काशीपुर नगर निगम की सीट पर कांग्रेस के संभावित प्रत्याशी को लेकर सस्पेंस गहराता जा रहा है।
मुक्ता सिंह, जो पिछले चुनाव में कांग्रेस की प्रत्याशी थीं, काशीपुर में पार्टी का सबसे मजबूत चेहरा मानी जाती हैं। उन्होंने जनता के बीच अपनी गहरी पकड़ बनाई है। पार्टी से लेकर पब्लिक तक, हर जगह उनकी छवि मज़बूत और भरोसेमंद बनी हुई है। उनकी मेहनत और जनता से जुड़ाव ने उन्हें इस सीट का सबसे प्रबल दावेदार बना दिया है।
हालांकि, पिछली बार मुक्ता सिंह ने भाजपा की प्रत्याशी उषा चौधरी को कांटे की टक्कर दी थी। भले ही जीत उनके हाथ से फिसल गई हो, लेकिन दिलचस्प यह है कि जीतने वाले से ज्यादा चर्चा मुक्ता सिंह के नाम की उनकी हार के बाद हुई थी। उनकी रणनीति, मेहनत और जनता के बीच गहरी पैठ ने उन्हें काशीपुर की राजनीति का ऐसा चेहरा बना दिया, जो हारकर भी जीतने वालों पर भारी पड़ा।
अब सवाल यह उठता है कि कांग्रेस इस बार भी मुक्ता सिंह पर भरोसा जताएगी, या किसी और चेहरे को मैदान में उतारेगी। पार्टी के भीतर असंतोष और खींचतान की खबरें भी हैं। कुछ नेता अपनी महत्वाकांक्षाओं के चलते पार्टी के फैसलों में अवरोध पैदा कर सकते हैं।
काशीपुर की जनता भी यही सवाल कर रही है – क्या कांग्रेस के पास मुक्ता सिंह से अधिक प्रभावशाली कोई दूसरा चेहरा है? या फिर, अगर कांग्रेस ने उन्हें टिकट नहीं दिया, तो क्या यह कदम पार्टी के लिए आत्मघाती साबित होगा?
पार्टी के सामने अब दो बड़ी चुनौतियां हैं – सही दावेदार का चयन और भीतर की राजनीति से निपटना।
अब नज़रें हाई कमान पर हैं। क्या कांग्रेस मुक्ता सिंह पर भरोसा जताकर काशीपुर में अपनी स्थिति मजबूत करेगी, या फिर किसी और नाम पर दांव लगाकर जोखिम उठाएगी? इस सस्पेंस का ताला कब खुलेगा, यह देखना दिलचस्प होगा।