खुलासा: आम पोखरा रेंज में रेंजर खानायत का ‘पापलोक’, द ग्रेट न्यूज़ को मिलीं चित्तलों की दो गुप्त कब्रें!
अज़हर मलिक
रामनगर (The Great News): तराई पश्चिमी डिवीजन की आम पोखरा रेंज से एक ऐसा सनसनीखेज सच सामने आया है, जो वन विभाग की कार्यशैली पर ही नहीं, बल्कि रेंजर पूरन सिंह खानायत की नीयत पर भी गहरे सवाल खड़े करता है। ‘The Great News’ की पड़ताल में चित्तलों की दो ऐसी कब्रें मिली हैं, जिन्हें रेंजर की शह पर चोरी-छिपे दफन कर दिया गया था।
साक्ष्यों पर ‘मिट्टी’ डालकर कब तक बचेंगे रेंजर?
चित्तल वन्यजीव श्रेणी 2 का वन्यजीव है नियम कहते हैं कि किसी भी वन्यजीव की मौत पर उसका पोस्टमार्टम अनिवार्य है, ताकि रहस्य में मौत के कारणों का पता लग सके लेकिन रेंजर पूरन सिंह खानायत के लिए शायद नियम उनके जूतों की नोक पर रहते हैं। बिना पोस्टमार्टम के आनन-फानन में चित्तलों को जमीन में गाड़ देना यह साबित करने के लिए काफी है कि दाल पूरी की पूरी काली है।
- क्या रेंजर साहब कि नाक के निचे खुलेआम हो रहा है छित्तलो का शिकार ?
- क्या इसके पीछे शिकारियों का कोई बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा है जिससे रेंजर पूरन सिंह खानायत भली भाति अवगत है?
- या फिर रेंजर साहब की नाक के नीचे कोई ऐसी बीमारी फैली है जिसे छुपाने के लिए लाशों को ठिकाने लगाया जा रहा है?
- इन दो कब्रों का मिलना महज़ इत्तेफाक नहीं, बल्कि उस ‘नरसंहार’ की गवाही है जिसे रेंजर पूरन सिंह खानायत अपनी तानाशाही से दबाना चाहते थे।
कुर्सी से चिपके रेंजर की ‘निजी सल्तनत’
सालों से एक ही रेंज पर कब्जा जमाए बैठे रेंजर खानायत ने आमपोखरा को अपनी निजी जागीर समझ लिया है। विभाग का अनुशासन उनके ‘तुगलकी फरमानों’ के आगे दम तोड़ चुका है। जब रक्षक ही भक्षक की भूमिका में आ जाए, तो बेजुबान जानवर न्याय की उम्मीद किससे करें? सैलानियों के आकर्षण का केंद्र रहने वाला यह टूरिस्ट जोन अब रेंजर की लापरवाही और संदिग्ध गतिविधियों के कारण वन्यजीवों के लिए श्मशान घाट बनता जा रहा है।
उच्चाधिकारियों की चुप्पी: मिलीभगत या मजबूरी?
हैरत की बात है कि टूरिस्ट जोन मे वन्यजीवो का कब्रिस्तान बनाया जा रहा है। इतना बड़ा खुलासा होने के बावजूद वन विभाग के आला अधिकारी कुंभकर्णी नींद मे सो रहे हैं। क्या रेंजर खानायत का रसूख इतना बड़ा है कि उन पर हाथ डालने से विभाग के हाथ कांप रहे हैं? जब तक खानायत इस कुर्सी पर बैठे हैं, किसी भी निष्पक्ष जांच की कल्पना करना बेमानी है। उन्हें तत्काल प्रभाव से हटाना ही जांच की पहली शर्त होनी चाहिए।
The Great News जंगलो मे हो रहे वन्यजीवो के नरसंहार रोकने कि अपील करते हुए जिम्मेदारो पर कार्यवाही कि मांग करता है। “दो कब्रें तो सिर्फ शुरुआत हैं, ‘The Great News‘ का कैमरा अब उन सभी गहरे राजों को बेनकाब करेगा जो इन घने जंगलों के सन्नाटे में दफन किए गए हैं। रेंजर साहब की ‘सल्तनत’ के दिन अब गिनती के हैं। बेजुबानों के लहू का हिसाब होकर रहेगा।
