‘धाकड़’ धामी का बड़ा एक्शन खाकी की मनमानी पर लगाम, पत्रकार उत्पीड़न मामले में मुख्यमंत्री ने दिए निष्पक्ष जांच और न्याय के सख्त आदेश
साहिल खान
देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि प्रदेश में सिर्फ और सिर्फ कानून का राज चलेगा। कानून को हाथ में लेने की इजाजत किसी को नहीं है—फिर चाहे वह खाकी वर्दी हो या खादी। मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में बुधवार को वरिष्ठ पत्रकार हेम भट्ट ने अपने परिवार सहित मुख्यमंत्री से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने अपने साथ हुई कथित पुलिसिया ज्यादती और उससे जुड़े विभिन्न संवेदनशील बिंदुओं से मुख्यमंत्री को विस्तार से अवगत कराया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पूरे प्रकरण को बेहद गंभीरता से सुना और मौके पर ही अधिकारियों को मामले में निष्पक्ष एवं न्यायोचित कार्रवाई सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट और दोटूक शब्दों में कहा कि इस पूरे मामले की जांच पूरी तरह तथ्यों के आधार पर की जाएगी और वरिष्ठ पत्रकार हेम भट्ट को हर हाल में न्याय दिलाना सुनिश्चित किया जाएगा। मुख्यमंत्री के इस कड़े रुख ने साफ कर दिया है कि देवभूमि में किसी भी निर्दोष का उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने पत्रकारिता के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। पत्रकारों की गरिमा, उनके सम्मान और अधिकारों का संरक्षण करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने पुलिस के उच्च अधिकारियों को निर्देशित किया कि मामले की निष्पक्षता से जांच कर आवश्यक कानूनी कदम उठाए जाएं, ताकि सत्ता या वर्दी के मद में चूर होकर कोई भी किसी निर्दोष व्यक्ति को प्रताड़ित न कर सके। इस महत्वपूर्ण मुलाकात के दौरान सूचना महानिदेशक बंशीधर तिवारी भी मौजूद रहे।
गौरतलब है कि हाल ही में वरिष्ठ पत्रकार हेम भट्ट को पुलिस द्वारा तड़के सुबह लगभग 4 बजे उनके घर से उठाए जाने का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया था। पुलिस की इस एकतरफा और मनमानी कार्रवाई को लेकर पत्रकार संगठनों और पूरे मीडिया जगत में भारी आक्रोश और नाराजगी देखने को मिली थी। पत्रकारों ने इसे सीधे तौर पर उत्पीड़न करार देते हुए मामले में उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग उठाई थी।
हालांकि बाद में चौतरफा दबाव के बीच पुलिस ने हेम भट्ट को रिहा कर दिया था, लेकिन इस घटना के बाद से प्रदेशभर के पत्रकारों में खाकी की कार्यप्रणाली को लेकर गहरा रोष व्याप्त था। तमाम पत्रकार संगठनों ने इसे प्रेस की स्वतंत्रता और पत्रकारों के आत्मसम्मान से जुड़ा एक बेहद गंभीर मामला बताया था। लेकिन अब सूबे के मुखिया पुष्कर सिंह धामी ने खुद इस मामले की कमान संभाल ली है। मुख्यमंत्री से मिली इस ठोस संजीवनी के बाद यह उम्मीद पूरी तरह जग गई है कि मामले में दूध का दूध और पानी का पानी होगा और दोषी अधिकारियों पर गाज गिरना तय है। ‘धाकड़’ धामी के इस न्यायप्रिय एक्शन के बाद अब सरकार और पुलिस प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं।



