आगरा में खाकी पर करप्शन का ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: LIU रिपोर्ट के बाद पुलिस महकमे में भूचाल, 6 पुलिसकर्मी निलंबित, 2 थाना प्रभारी लाइन हाजिर
अज़हर मलिक
जिस महकमे के कंधों पर कानून-व्यवस्था का जिम्मा है, जब वहीं से भ्रष्टाचार की बू आने लगे तो फिर गाज गिरना तय माना जाता है। आगरा पुलिस महकमे में भी कुछ ऐसा ही हुआ, जहाँ करप्शन की गुप्त शिकायतों और एलआईयू (LIU) की गोपनीय रिपोर्ट ने पुलिस अधिकारियों के होश उड़ा दिए। अंदरखाने चल रही इस काली कमाई और बदनामी के खेल पर जैसे ही आलाधिकारियों की नजर पड़ी, पूरे विभाग में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस आयुक्त ने एक बड़ा और सख्त कदम उठाते हुए अनुशासनहीनता और भ्रष्टाचार में लिप्त कर्मियों पर बड़ा ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ कर दिया है।
इस कार्रवाई की जद में आए छह पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। गाज गिरने वालों में थाना जगनेर के कांस्टेबल अंकित कुमार, जगनेर के ही निरीक्षक (अपराध) विजेंद्र सिंह, बमरौली कटारा थाने के हेड कांस्टेबल राशिद अली, एसीपी खेरागढ़ कार्यालय में तैनात हेड कांस्टेबल धर्मेंद्र सिंह, डौकी थाने के कांस्टेबल राजीव पराशर और किरावली थाने के कांस्टेबल संचित शामिल हैं। इन सभी पर भ्रष्टाचार और संदिग्ध गतिविधियों में शामिल होने के पुख्ता आरोप हैं, जिसके बाद यह निलंबन की कड़ी कार्रवाई अमल में लाई गई है।
सिर्फ मातहत कर्मचारी ही नहीं, बल्कि थानों की कमान संभालने वाले बड़े अधिकारियों पर भी इस कार्रवाई की आंच पहुँची है। प्रशासनिक लापरवाही और क्षेत्र में घट रही गतिविधियों पर अंकुश न लगा पाने के चलते सदर थाना प्रभारी (SHO) विजय विक्रम सिंह और जगनेर थाना प्रभारी (SHO) सुभाष चंद्र को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया गया है। खुफिया विभाग की रिपोर्ट के बाद हुई इस अचानक और बड़ी कार्रवाई से जिले के सभी थानों और चौकियों में सन्नाटा पसरा हुआ है, वहीं पुलिस महकमे में साफ संदेश चला गया है कि भ्रष्टाचार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।



