उत्तराखंड: मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए फॉर्म 7 के दुरुपयोग पर कड़ा रुख, 6 जिलाधिकारियों को नियम सख्ती से लागू करने के निर्देश

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उत्तराखंड: मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए फॉर्म 7 के दुरुपयोग पर कड़ा रुख, 6 जिलाधिकारियों को नियम सख्ती से लागू करने के निर्देश

​विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से नाम हटवाने के लिए भरे जाने वाले ‘फॉर्म 7’ के गलत और फर्जी इस्तेमाल की शिकायतों को उत्तराखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय ने बेहद गंभीरता से लिया है। सूचना अधिकार व मानवाधिकार कार्यकर्ता तथा वरिष्ठ अधिवक्ता नदीम उद्दीन द्वारा सौंपी गई विस्तृत जांच रिपोर्ट और सुझावों के आधार पर राज्य निर्वाचन आयोग ने 6 जिलों—हरिद्वार, पिथौरागढ, अल्मोड़ा, चंपावत, नैनीताल और उधम सिंह नगर के जिलाधिकारियों व जिला निर्वाचन अधिकारियों को त्वरित और ठोस कदम उठाने का आदेश दिया है।

​आयोग के उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी किशन सिंह नेगी द्वारा जारी आधिकारिक निर्देश में सभी संबंधित निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ईआरओ) को स्पष्ट हिदायत दी गई है कि वे लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950, निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण नियम 1960 और इलेक्टोरल रोल्स मैनुअल के प्रावधानों का बिना किसी चूक के कड़ाई से पालन करें। आयोग ने नदीम उद्दीन द्वारा पेश किए गए उन विश्लेषणात्मक तथ्यों का भी संज्ञान लिया है, जिनमें अत्यधिक आपत्तियों वाली विधानसभा सीटों की निशानदेही की गई थी।

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​इस पूरी प्रक्रिया की शुरुआत एडवोकेट नदीम उद्दीन द्वारा प्रेषित एक पत्र से हुई, जिसमें उन्होंने बेनामी, गलत और दुर्भावनापूर्ण ढंग से दाखिल की जाने वाली आपत्तियों से पात्र नागरिकों के मताधिकार पर मंडराते खतरे को रेखांकित किया था। उन्होंने आयोग से मांग की थी कि जिन मामलों में आपत्तिकर्ता की पहचान स्थापित न हो सके, उन्हें तत्काल खारिज किया जाए। इसके साथ ही, वैध आपत्तियों के मामलों में आपत्तिकर्ता से कड़े साक्ष्य मांगे जाएं और जिस व्यक्ति के नाम पर आपत्ति जताई गई है, उसे अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर प्रदान किया जाए।

​शिकायत पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी का नाम फर्जी तरीके से हटवाने का प्रयास करना एक गंभीर कानूनी अपराध है। ऐसा करने वालों पर लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 31, सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम की धारा 66सी व 66डी, और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत जालसाजी, धोखाधड़ी और झूठे दस्तावेज पेश करने के मामले दर्ज कर आपराधिक कार्रवाई की जानी चाहिए।

​मुख्य निर्वाचन अधिकारी वी.वी.आर. पुरुषोत्तम और उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा लिए गए इस त्वरित निर्णय पर एडवोकेट नदीम ने संतोष व्यक्त करते हुए उम्मीद जताई है कि जिला स्तर पर इन आदेशों का पालन होने से निर्दोष और पात्र मतदाताओं के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा संभव हो सकेगी।

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