बाजपुर में मौत का मंडराता साया! आशा फैसिलिटेटर का खौफनाक फर्जीवाड़ा उजागर, DNC करते कलेजा कंपा देने वाला वीडियो वायरल: स्वास्थ्य महकमे की मिलीभगत पर उठे तीखे सवाल
अज़हर मलिक
बाजपुर उप-जिला चिकित्सालय के बिल्कुल करीब मौत का एक ऐसा खौफनाक अड्डा फल-फूल रहा है, जिसकी हकीकत सुनकर किसी का भी कलेजा कांप उठे। सरोज यादव नाम की महिला का एक बेकसूर मरीज पर अवैध रूप से DNC (गर्भपात/सफाई) जैसी जानलेवा प्रक्रिया को अंजाम देते हुए रोंगटे खड़े कर देने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। रक्षक ही भक्षक बन बैठी यह महिला कोई डॉक्टर नहीं, बल्कि स्वास्थ्य विभाग की ही आशा फैसिलिटेटर है। बिना किसी मेडिकल डिग्री या विशेषज्ञता के, केवल चंद रुपयों के लालच में, यह महिला ब्लेड और औजारों से मासूम लोगों की जिंदगियों पर मौत का तांडव रचा रही है। किसी अनजान की सांसें छीनने पर आमादा यह कृत्य किसी खौफनाक जुर्म से कम नहीं है।
इस पूरे दिल दहला देने वाले मामले में सबसे जहरीला सच उधम सिंह नगर और बाजपुर के स्वास्थ्य महकमे की खामोशी है। यह कोई पहली बार नहीं है जब यह घिनौना खेल उजागर हुआ है; अतीत में तीन-चार बार या उससे भी अधिक बार इसके अवैध अड्डों पर सीलिंग की कार्रवाई हो चुकी है। लेकिन हर बार कानून के खोखलेपन का फायदा उठाकर यह महिला अस्पताल का नाम, उसका चेहरा और ठिकाना (स्थान) बदलकर फिर से अपनी ‘मौत की दुकान’ सजा लेती है। हद तो तब हो गई जब पूर्व में एक चेकिंग के दौरान यह महिला अपनी विभागीय आशा फैसिलिटेटर की ड्रेस में ही निजी अस्पताल से धरी गई थी, लेकिन अधिकारियों की बेशर्म ढिलाई के कारण इसे हर बार अभयदान मिलता रहा।
बार-बार अस्पताल का ठिकाना बदलकर लोगों की जान से खिलवाड़ करना इस बात का सबूत है कि जिला मुख्यालय में बैठे जिम्मेदार अधिकारियों की मेहरबानी और साठगांठ इस पर पूरी तरह मेहरबान है। क्या स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों ने चंद पैसों के लालच में आम जनता की सांसों का सौदा कर लिया है? एक तरफ जहां औलाद की तड़प में परिवार दिन-रात रो-रोकर भगवान से गुहार लगाते हैं, वहीं दूसरी तरफ ये नीम-हकीम उन्हें गुमराह कर सीधे श्मशान का रास्ता दिखा रहे हैं। आँखों के सामने वायरल वीडियो के रूप में मौत के इस नंगे नाच का पुख्ता सबूत होने के बावजूद स्वास्थ्य महकमा कार्रवाई करने से क्यों कतरा रहा है?
अब सबसे बड़ा और चुभता हुआ सवाल यह है कि इस खौफनाक वीडियो के सामने आने के बाद भी क्या आला अधिकारी हमेशा की तरह फाइलों में जांच का ढोंग रचकर इस जुर्म पर पर्दा डालेंगे? या फिर इस फर्जी डॉक्टर और इसे शह देने वाले पूरे सफेदपोश सिंडिकेट पर ऐसी रूह कंपा देने वाली कार्रवाई होगी जो मिसाल बने? अगर अब भी अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे, तो यह साबित हो जाएगा कि बाजपुर की सड़कों पर लोगों की जिंदगियों का यह खूनी सौदा उन्हीं की सरपरस्ती में खेला जा रहा है।




