मालधन तुमाड़िया डैम से अवैध खैर कटान का खुलासा होते ही जागा वन विभाग, काशीपुर में 30 कुंतल खैर बरामद, पर कई यक्ष प्रश्न अब भी बरकरार
सलीम अहमद साहिल /अज़हर मलिक
‘The Great News’ ने मालधन तुमाड़िया डैम क्षेत्र से अवैध खैर की लकड़ी बरामदगी और कटान की खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था, जिसके बाद नींद से जागे वन विभाग ने त्वरित कार्रवाई शुरू कर दी है। अपने सटीक मुखबिर तंत्र के लिए पहचाने जाने वाले जांबाज रेंजर शेखर तिवारी ने तुरंत अपनी पूरी टीम को एक्टिवेट किया और मुखबिर की सटीक सूचना पर काशीपुर क्षेत्र में औचक छापामारी कर लगभग 30 कुंतल अवैध खैर प्रकाष्ठ बरामद कर लिया, जिसकी अनुमानित कीमत करीब एक लाख रुपये आंकी गई है।
इस पूरी कार्रवाई को रेंजर शेखर तिवारी के कुशल नेतृत्व में डिप्टी रेंजर जगदीश पांडे, वन दरोगा मोहम्मद इमरान, अजमत खान, वन आरक्षी जगदीश प्रसाद, विमल चौधरी, इकरामुद्दीन और तराई पश्चिमी वन सुरक्षा बल के जवानों ने मुस्तैदी से अंजाम दिया। इस बड़ी बरामदगी से तस्करों में हड़कंप जरूर मचा है, लेकिन इसके साथ ही विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
आखिर इतनी बड़ी संख्या में हरे-भरे खैर के पेड़ों को जंगलों से बेखौफ कैसे धराशायी किया जा रहा है और वह कौन सी रेंज है जहां से लकड़ी तस्करी का यह पूरा खेल बेरोकटोक जारी है? खाकी में छिपा वह कौन सा काला भेड़िया है जो वन विभाग में ही रहकर जंगलों को उजाड़ने में जुटा है और अपनी जेबें भरकर ऐशो-आराम की जिंदगी जी रहा है?
आखिर वे कौन से रसूखदार तस्कर हैं जिनके आगे तंत्र बेबस नजर आ रहा है और यह सिंडिकेट लगातार नव-नियुक्त DFO पुनीत तोमर और SDO संदीप गिरी के इकबाल को खुली चुनौती दे रहा है? एक के बाद एक सामने आ रहे तस्करी के इन मामलों से ऐसा प्रतीत होता है मानो लकड़ी तस्कर यह मान बैठे हों कि तराई पश्चिमी प्रभाग में पूर्व DFO प्रकाश चंद्र आर्य का दौर बीत चुका है और मौजूदा अधिकारियों को ललकारना उनके लिए आसान है। तस्करों के गिरेबान तक कानून के हाथ कब पहुंचेंगे और इस गिरोह के मास्टरमाइंड को सलाखों के पीछे भेजा जाएगा या नहीं, यह तो वक्त बताएगा, लेकिन फिलहाल इस सिंडिकेट को ध्वस्त करना नए DFO और उनकी टीम के लिए सबसे बड़ी परीक्ष बन चुका है।
नए डीएफओ को लकड़ी माफियाओं की ‘सलामी’, तराई पश्चिमी डिवीजन में सुरक्षा तंत्र की खुली पोल
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