खैर के लकड़ी तस्करो के सुहाने सपनो पर चला रेंजर नवल किशोर कपिल का कानूनी बुलडोजर तस्करो के सपने ध्वस्त। 

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खैर के लकड़ी तस्करो के सुहाने सपनो पर चला रेंजर नवल किशोर कपिल का कानूनी बुलडोजर तस्करो के सपने ध्वस्त। 

         अज़हर मालिक / सलीम अहमद साहिल 

 

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तराई पश्चिमी डिवीजन रामनगर कि रेंज बन्नाखेड़ा मे खैर के तस्कर बड़े बड़े सुहाने सपने लेकर लकड़ी तस्करी करने के खाव लेकर निकले थे लेकिन खैर कि लकड़ी तस्करो के सुहाने सपनो पर रेंजर नवल किशोर कपिल के कानूनी बुलडोजर ने तस्करो के सपनो को ध्वस्त कर दिया है

 

 

उत्तराखंड के तराई पश्चिमी वन प्रभाग के बन्नाखेड़ा रेंज में वन माफिया और अवैध तस्करों के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा और घातक प्रहार देखने को मिला है। रेंजर नवल किशोर कपिल के कुशल नेतृत्व, पैनी रणनीतिक दृष्टि और निडर कार्यशैली के बल पर वन विभाग की जांबाज टीम ने तस्करों के खतरनाक मंसूबों को पल भर में ध्वस्त कर दिया। गुप्त सूचना मिलते ही जिस बिजली जैसी तेज़ी और अचूक घेराबंदी के साथ मौना कॉलोनी में छापेमारी की गई, उसने इलाके के संगठित वन अपराधियों की रीढ़ तोड़कर रख दी है। बन्नाखेड़ा रेंज की इस ऐतिहासिक सफलता ने यह साबित कर दिया है कि जब नेतृत्व में दृढ इच्छाशक्ति हो, तो वन संपदा का एक पत्ता भी नुकसान पहुंचाना नामुमकिन हो जाता है।

 

 

कार्रवाई इतनी सटीक और आक्रामक थी कि वन विभाग की गाड़ियों का काफिला देखते ही पिकअप वाहन (रजिस्ट्रेशन नंबर: UA04D 8691) में सवार दो शातिर तस्कर खौफ के मारे अपनी गाड़ी मौके पर ही छोड़कर भाग खड़े हुए। जब टीम ने वाहन पर ढकी पीली तिरपाल हटाई, तो उसमें से विभिन्न आकार के 42 बेशकीमती छिले हुए खैर के लट्ठे मिले, जिनका कुल वजन 30 कुंतल के करीब था। बाज़ार में इस प्रतिबंधित लकड़ी की कीमत लगभग 1,80,000 रुपये आंकी गई है। रेंजर नवल किशोर कपिल और उनकी टीम ने न सिर्फ अवैध लकड़ी और वाहन को अपनी कस्टडी में लिया, बल्कि तस्करों के नेटवर्क की जड़ें खोदने के लिए गहन जांच का ताना-बाना भी बुन दिया है। वन एवं वन्य जीवों की सुरक्षा के प्रति समर्पित बन्नाखेड़ा रेंज के इस महाअभियान ने पूरे क्षेत्र में वन तस्करों के बीच खौफ का माहौल कायम कर दिया है।

 

 

 

रामनगर प्रभाग के उच्च अधिकारियों के मार्गदर्शन में रेंजर नवल किशोर कपिल की अगुवाई वाली टीम ने स्पष्ट कर दिया है कि वनों पर अवैध कटान, अतिक्रमण या तस्करी की कोशिश करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। वन सुरक्षा की इस बेमिसाल मिसाल और रेंजर के साहसिक फैसले की बदौलत आज बन्नाखेड़ा के जंगल महफूज़ हैं और विभाग का इकबाल बुलंदियों पर है।

 

 

इस पूरी कार्यवाही करने वाली टीम मे उप वन क्षेत्राधिकारी दीवान सिंह रौतेला, वन दरोगा सुरेश चंद्र तिवारी, वन आरक्षीगण मोनू, विशाल, ज्ञान सिंह, मोहित कम्बोज, तथा आउटसोर्स कर्मी युवराज सिंह, किशन सिंह, आदि शामिल रहे

 

 

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