हजरतगंज से लखनऊ की काली गलियों तक: शिवा शर्मा हत्याकांड में श्रद्धा दुबे के रहस्यमयी जाल का खौफनाक पर्दाफाश!
राजधानी लखनऊ की फिजाओं में इस वक्त एक ऐसे खौफनाक और सनसनीखेज खेल की चर्चा है, जिसने हर किसी को सन्न कर दिया है। कारोबारी शिवा शर्मा हत्याकांड की मुख्य फरार आरोपी श्रद्धा दुबे की दास्तान किसी फिल्मी थ्रिलर फिल्म से कम नहीं है। चमक-धमक की दुनिया में वीवीआईपी मेहमान बनने वाली, ‘नारी शक्ति’ के नाम पर मंचों पर सम्मानित होने वाली और रसूखदारों के नाम का खौफ दिखाकर सिस्टम को अपनी उंगलियों पर नचाने वाली इस महिला के काले कारनामे अब एक-एक करके बेनकाब हो रहे हैं। पुलिस की फाइलों से लेकर सोशल मीडिया के गलियारों तक, यह कहानी अब हर जुबान पर है।
साजिश और रसूख का पहला पड़ाव: हजरतगंज थाने का वह ड्रामा
इस रोंगटे खड़े कर देने वाले खेल की शुरुआत इसी साल जनवरी में तब हुई, जब लखनऊ के वीआईपी कहे जाने वाले हजरतगंज थाने में सनसनी फैल गई। श्रद्धा दुबे ने अपने ही ड्राइवर इमरान के खिलाफ छेड़खानी का गंभीर मुकदमा दर्ज कराया था। लेकिन इस मामले में असली ट्विस्ट तब आया जब यह बात सामने आई कि प्रयागराज के एक रसूखदार विधायक ने फोन पर इस शातिर महिला को अपनी ‘भतीजी’ बताकर उसकी पैरवी की थी। खाकी ने भी बिना देर किए दबाव के आगे झुकते हुए छेड़खानी और अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया। यहीं से इस शातिर किरदार को यह यकीन हो गया कि उसकी पहुंच कानून से भी ऊपर है।
“दिल से बद्दुआ है…”: साजिश के पन्नों से बाहर आई वो खौफनाक चैट
जांच की आंच जैसे-जैसे तेज हो रही है, वैसे-वैसे दिल दहला देने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। श्रद्धा दुबे से जुड़ी बताई जा रही एक कथित चैट इस वक्त चर्चा का केंद्र बनी हुई है। इस वायरल चैट में शिवा शर्मा के लिए नफरत और गुस्से की आग साफ झलकती है। चैट के अल्फाज बयां करते हैं, ‘शिवा सीरियसली, दिल से बद्दुआ है तुम्हारे लिए। जैसे तुमने मेरा इस्तेमाल करके अपना व्यवहार बदल दिया न… वैसे ही तुम्हारे साथ कुछ ऐसा हो कि किसी का इस्तेमाल करने लायक न रह जाओ।’ इस संदेश में शिवा द्वारा बार-बार फोन करने और फिर अचानक किनारा कर लेने पर जबरदस्त तंज कसा गया है। हालांकि, इन संदेशों की प्रामाणिकता की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है, लेकिन ये शब्द इस खूनी खेल की तरफ साफ इशारा कर रहे हैं।
वीवीआईपी मंच और ‘नारी शक्ति’ का मुखौटा
अपराध की दुनिया में परदे के पीछे साजिशें रचने वाली श्रद्धा दुबे का दूसरा चेहरा बड़ा ही हैरान करने वाला है। एक तरफ वह कानून की नजरों से बचकर जालसाजी कर रही थी, तो दूसरी तरफ वह लखनऊ के एक बड़े डांडिया फेस्ट में खास वीवीआईपी अतिथि के तौर पर चमक रही थी। यही नहीं, बीते अगस्त के महीने में एक गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) के कार्यक्रम में उसे ‘नारी शक्ति सम्मान’ से भी नवाजा गया। मुखौटा समाजसेविका और नारी शक्ति का, लेकिन अंदर ही अंदर ब्लैकमेलिंग का यह काला धंधा शहर के तमाम रसूखदारों की रातों की नींद उड़ा रहा था।
ब्लैकमेलिंग का गंदा खेल और टारगेट पूरा होते ही सिम कार्ड बदलने की चाल
पुलिस और जांच एजेंसियों के सामने आ रहे दावों के मुताबिक, श्रद्धा दुबे का वार करने का तरीका बेहद शातिर था। वह पहले लोगों को अपने जाल में फंसाती, अपने टारगेट्स को पूरा करती और फिर पलक झपकते ही अपना मोबाइल नंबर बदल लेती थी। अब तक चार अलग-अलग मोबाइल नंबर बदलने की बात सामने आ चुकी है, जिससे वह आसानी से जांच एजेंसियों की नजरों से बचती फिर रही थी। यह किसी शातिर अपराधी की तरह सबूत मिटाने और खुद को बचाने का एक सुनियोजित तरीका था।
जरूरी कानूनी सूचना: इस खबर में प्रस्तुत सभी विवरण, कथित चैट्स, एनजीओ सम्मान से जुड़े दावे, ड्राइवर के खिलाफ दर्ज मुकदमे, और चार मोबाइल नंबर बदलने के संबंध में लगाए गए आरोप वर्तमान में जांच के दायरे में और प्रथम दृष्टया आरोप हैं। इन सभी बिंदुओं की पुष्टि अभी संबंधित जांच एजेंसियों की आधिकारिक जांच और अदालत के अंतिम निष्कर्षों के आधार पर होना बाकी है। किसी भी व्यक्ति को तब तक दोषी नहीं माना जा सकता जब तक कानूनन अदालत द्वारा दोष सिद्ध न हो जाए।
इंसाफ के इंतजार में सिसकता परिवार और सुलगते सवाल
इधर, शिवा शर्मा का परिवार आज भी न्याय के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है। परिवार का सीधा और गंभीर आरोप है कि इस शातिर आरोपी के पास राजनीतिक रसूख और मजबूत संपर्कों की ढाल है, जिसके दम पर वह कानून की पकड़ से दूर भाग रही है। शिवा हत्याकांड की इस रहस्यमयी और फरार आरोपी की तलाश अब पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी है। क्या खाकी का शिकंजा इस शातिर चेहरे तक पहुंच पाएगा या रसूख के परदे के पीछे यह खेल यूं ही जारी रहेगा? इन तमाम सवालों के जवाब अब केवल निष्पक्ष जांच और पुलिस की आगामी कार्रवाई पर टिके हैं।



