दिवाली से पहले धन वर्षा का झांसा देने वाला तंत्र-मंत्र का सौदागर गिरफ्तार, 114 जोड़े हत्था जोड़ी और जंगली जीवों के अंगों का बड़ा जखीरा बरामद

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दिवाली से पहले धन वर्षा का झांसा देने वाला तंत्र-मंत्र का सौदागर गिरफ्तार, 114 जोड़े हत्था जोड़ी और जंगली जीवों के अंगों का बड़ा जखीरा बरामद

सलीम अहमद साहिल

दीपावली के उल्लास और रोशनी के पर्व के ठीक मुहाने पर जब हर कोई लक्ष्मी पूजन की तैयारियों में जुटा होता है, तब कुछ शातिर तत्व भोले-भाले लोगों की आस्था और अंधविश्वास का फायदा उठाकर अंधेर नगरी का खेल खेलने से बाज नहीं आते। ऐसा ही एक सनसनीखेज मामला तराई पश्चिम वन प्रभाग के अधिकार क्षेत्र से सामने आया है, जहां वन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने त्वरित और अचूक कार्रवाई करते हुए एक ऐसे जालसाज को धर दबोचा जो तंत्र-मंत्र और धन प्राप्ति के नाम पर मूक-बेजुबान वन्य जीवों के अंगों की खौफनाक तस्करी कर रहा था। आरोपी आकाश दीक्षित अपनी इंस्टाग्राम आईडी और गुप्त नेटवर्क के जरिए दीपावली पर रातों-रात अमीर बनने का ख्वाब दिखाने वाले लोगों को ठगने का घिनौना कारोबार चला रहा था, लेकिन तराई के जंगलों में अब प्रशासनिक सख्ती इतनी कड़ी हो चुकी है कि अपराधियों की हर चाल धरी की धरी रह गई है।

 

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इस पूरे ऑपरेशन की सफलता का सबसे बड़ा श्रेय तराई पश्चिम के दूरदर्शी और सख्त मिजाज प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) पुनीत तोमर की उन अचूक रणनीतिक दिशा-निर्देशों को जाता है, जिन्होंने जंगलों और वन्य जीवों की सुरक्षा को लेकर पूरे प्रभाग में एक अभेद्य सुरक्षा चक्र और गश्त का ऐसा तंत्र विकसित किया है कि परिंदा भी पर नहीं मार सकता। उनके इसी स्पष्ट और कड़े विजन का नतीजा है कि जसपुर दक्षिणी रेंज में वन विभाग की टीम ने पलक झपकते ही कार्रवाई करते हुए राजपूत सभाभवन के पास से आरोपी को तीन संदिग्ध प्लास्टिक डिब्बों के साथ दबोच लिया। मौके पर पहुंचे जसपुर दक्षिणी रेंज के कुशाग्र बुद्धि और कर्तव्यनिष्ठ वन क्षेत्राधिकारी अनुस्वार टम्टा ने जब माल की तस्दीक की, तो उनके भी होश उड़ गए क्योंकि डिब्बों के भीतर से जो निकला, वह इंसानियत और प्रकृति दोनों को शर्मसार करने वाला था।

 

 

 

बरामदगी के इस खौफनाक बक्से में बंगाल मॉनिटर लिज़ार्ड यानी गोह के अंगों से बने 114 जोड़े ‘हत्था जोड़ी’, एक जंगली सूअर का दांत और पांच दुर्लभ मोती शंख बरामद हुए, जो सभी वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 के तहत कठोरता से संरक्षित प्रजातियां हैं। पूछताछ में यह हैरान करने वाला सच भी सामने आया कि हरिद्वार के अमन नाम के तस्कर से महज चार-सैकड़ों में इन अंगों को खरीदकर यह शातिर इंस्टाग्राम के जरिए अंधविश्वासी ग्राहकों को चार से पांच हजार रुपये में बेचता था, ताकि दीपावली के बहाने लोग तंत्र-मंत्र के जाल में फंसकर मालामाल होने का भ्रम पाल सकें। इस पूरी कार्रवाई में रेंजर अनुस्वार टम्टा और वन दरोगा हरीश चन्द्र सिंह नयाल की पैनी निगाहों और अदम्य साहस ने जहां वन्य जीवों के रक्षक की भूमिका निभाई, वहीं कोतवाली जसपुर के उपनिरीक्षक बसंत प्रसाद, कांस्टेबल बिरेन्द्र दत्त और काशीपुर SOG प्रभारी सुनील सुतेड़ी व उनकी पूरी टीम ने समन्वय का ऐसा बेहतरीन नमूना पेश किया कि तस्कर का साम्राज्य एक ही झटके में नेस्तनाबूद हो गया।

 

 

 

अब इस शातिर अभियुक्त के खिलाफ थाना कोतवाली जसपुर में वन्य जीव संरक्षण अधिनियम की गंभीर धाराओं के तहत अभियोग पंजीकृत कर कानूनी शिकंजा कस दिया गया है, जो इस बात की बानगी है कि प्रकृति और वन्य जीवों के दुश्मनों के लिए तराई के जंगल अब काल बन चुके हैं। डीएफओ पुनीत तोमर के सख्त नेतृत्व, रेंजर अनुस्वार टम्टा की मुस्तैद टीम और पुलिस के जांबाज सिपाहियों की इस बेहतरीन जुगलबंदी ने यह साबित कर दिया है कि दीपावली के इस पवित्र पर्व पर अंधविश्वास के सौदागरों और वन्यजीव तस्करों की खैर नहीं है, और कानून का डंडा हर उस शख्स पर पूरी ताकत से बरसेगा जो प्रकृति के सुकुमार आंचल को मैला करने की जुर्रत करेगा।

 

 

 

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