वादों की फाइलों में दफन हुई ‘मौत की दुकान’: 30 अगस्त के खुलासे और 5 सितंबर के आदेश के बाद भी स्वास्थ्य विभाग सुस्त क्यों?
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स्थान: बाजपुर (उधमसिंहनगर)
बाजपुर (उधमसिंहनगर): बाजपुर उप-जिला चिकित्सालय के पास फर्जी डॉक्टर बनी आशा फैसिलिटेटर सरोज यादव के खौफनाक और अवैध DNC (गर्भपात) खेल का पर्दाफाश ‘द ग्रेट न्यूज’ ने सबसे पहले 30 अगस्त को वायरल वीडियो और ठोस सबूतों के साथ किया था। खबर सामने आते ही पूरे जिले में हड़कंप मच गया था।
इसके बाद 5 सितंबर 2026 को खबर का बड़ा असर देखने को मिला, जब बाजपुर की उप-जिलाधिकारी (SDM) ऋचा सिंह ने मामले पर कड़ा संज्ञान लेते हुए चिकित्सा अधीक्षक को तत्काल जांच और कड़ी कार्रवाई के लिखित निर्देश जारी किए। इस त्वरित प्रशासनिक पहल की जनता ने भरपूर सराहना की थी।
लेकिन मुख्य सवाल यह है कि 5 सितंबर के उस कड़े आदेश के इतने दिन बीत जाने के बाद भी आखिर धरातल पर क्या कार्रवाई हुई?
آदेशों का ढोंग या फाइलों को दबाने का खेल?
30 अगस्त को वीडियो वायरल हुआ, 5 सितंबर को SDM का चाबुक चला। लेकिन आज इतने समय बाद भी स्वास्थ्य महकमे की स्थिति जस की तस बनी हुई है। ताजे मामले में केवल कार्रवाई का आश्वासन दिया गया, लेकिन हकीकत में दोषी के खिलाफ कोई ठोस दंडात्मक या कानूनी कदम नहीं उठाया गया। स्वास्थ्य विभाग की यह रहस्यमयी खामोशी कई गंभीर सवाल खड़े करती है।
क्या इंसानी जिंदगी से ज्यादा किसी का रसूख और पैसा मायने रखता है?
सरकारी अस्पताल की नाक के नीचे धारदार औजारों से मासूम जिंदगियों का सौदा करने वाली आरोपी महिला पूर्व में 3-4 बार सीलिंग की कार्रवाई के बावजूद बार-बार ठिकाना बदलकर यह अवैध धंधा चलाती रही। अब क्षेत्रीय जनता खुलकर सवाल पूछ रही है:
- रसूख बनाम कानून: क्या इंसानी जिंदगी की कोई कीमत नहीं बची? क्या किसी का रसूख और पैसों का बोलबाला कानून से भी बड़ा हो चुका है?
- विभागीय सहभागिता: बिना किसी बड़े विभागीय संरक्षण और उच्च अधिकारियों की मिलीभगत के कोई कर्मचारी बार-बार मौत की दुकान कैसे सजा सकता है?
- आदेशों की अवहेलना: SDM ऋचा सिंह के कड़े आदेशों के बावजूद स्वास्थ्य महकमा किसके दबाव में फाइलें दबाकर बैठा है?
कब जागेगा बेपरवाह स्वास्थ्य महकमा?
जांच के नाम पर फाइलों को दबाना और सफेदपोश अपराधियों को अभयदान देना स्वास्थ्य विभाग की पुरानी आदत बन चुकी है। ‘द ग्रेट न्यूज’ प्रशासन से सीधा सवाल करता है कि क्या किसी बेगुनाह की जान जाने के बाद ही विभाग की नींद टूटेगी, या फिर SDM के आदेश का पालन करते हुए इस खौफनाक सिंडिकेट को जड़ से उखाड़कर जेल भेजा जाएगा?


