पूछड़ी में फिर गरजेगा प्रशासन का पीला पंजा। 82 आशियानों पर मंडराया उजड़ने का खतरा, बेबस परिवारों की आंखों में कैद हुआ बेघर होने का खौफ।
सलीम अहमद साहिल
तराई पश्चिमी वन प्रभाग के अपर कोसी क्षेत्र पूछड़ी में कल से चलने वाले प्रशासन के पीले पंजे की खबर से दर्जनों परिवारों की रातों की नींद और दिन का चैन छिन गया है। वर्षों से जिस ज़मीन को अपने खून-पसीने से सींचकर लोगों ने सिर छिपाने की छत बनाई थी, उसी आशियाने के उजड़ने की आहट ने पूरे इलाके में मातम सा सन्नाटा पसार दिया है। 82 मकानों को ध्वस्त करने की इस प्रस्तावित कार्रवाई ने सैकड़ों मासूम बच्चों, बिलखती माताओं और लाचार बुजुर्गों को एक ही झटके में बेघर होने की कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है।


हर तरफ सिर्फ खौफ, लाचारी और बेबसी का मंजर है। घरों के भीतर बरसों से सहेजी गई एक-एक ईंट, तिनका-तिनका जोड़कर सजाया गया संसार और बच्चों के खिलौने अब मलबे का ढेर बनने जा रहे हैं। बिलखते हुए बुजुर्ग सवाल पूछ रहे हैं कि ढलती उम्र में वे अपने इस भरे-पूरे कुनबे को लेकर आखिर कहां जाएंगे? जिस जमीन पर उनकी पीढ़ियां पली-बढ़ीं, वहां कल बुलडोजर का गर्जन उनके आशियाने को रौंद डालेगा। 4 सुपर जोन, 7 जोन, 14 सेक्टर और भारी पुलिस बल की इस मुस्तैदी ने गरीबों के आंसुओं और गुहार को पूरी तरह दबा दिया है; नियम और कानूनों की फाइलों के तले उजड़ते इंसानी दर्द की अब कहीं कोई सुनवाई होती नज़र नहीं आ रही है।