देहरादून कैंट सीट पर भाजपा में हलचल तेज, क्या कपूर परिवार की विरासत रहेगी कायम या मिलेगा नया चेहरा?
उत्तराखंड की राजनीति में देहरादून कैंट विधानसभा सीट हमेशा से बेहद खास मानी जाती रही है। साल 1985 से यह सीट भारतीय जनता पार्टी का मजबूत गढ़ बनी हुई है। स्वर्गीय हरबंस कपूर ने इस सीट को भाजपा का अभेद्य किला बनाया और अब सवाल उठ रहा है कि क्या पार्टी इस राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाएगी या फिर किसी नए चेहरे पर भरोसा जताएगी।
कपूर परिवार का दबदबा अब भी बरकरार
उत्तराखंड गठन से पहले यूपी के दौर में 1985 में हरबंस कपूर ने देहराखास सीट से जीत दर्ज की थी। इसके बाद लगातार कई चुनावों तक उन्होंने कैंट सीट पर भाजपा का परचम लहराया। 2017 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने भारी मतों के अंतर से जीत हासिल की थी।
हरबंस कपूर के निधन के बाद भाजपा ने 2022 विधानसभा चुनाव में उनकी पत्नी सविता कपूर पर भरोसा जताया। सविता कपूर ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए कांग्रेस प्रत्याशी सूर्यकांत धस्माना को बड़े अंतर से हराकर सीट बचाए रखी।
अब भाजपा के सामने सबसे बड़ा सवाल
सविता कपूर की बढ़ती उम्र को देखते हुए अब भाजपा में नए चेहरे की चर्चा तेज हो गई है। पार्टी के भीतर कई नेता इस सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी में जुटे हुए हैं।
- भाजपा प्रदेश मंत्री आदित्य चौहान
- भाजपा नेता विनय गोयल
- जोगेंद्र पुंडीर
- महानगर अध्यक्ष सिद्धार्थ अग्रवाल
वहीं दूसरी तरफ भाजपा के सामने यह भी विकल्प है कि वह हरबंस कपूर की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए उनके बेटे अमित कपूर को मैदान में उतारे।
कैंट सीट क्यों मानी जाती है भाजपा की सबसे मजबूत सीट?
देहरादून कैंट विधानसभा क्षेत्र सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जाता है। यहां बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक, सेना से जुड़े परिवार, गोरखा समुदाय, पंजाबी और व्यापारी वर्ग के मतदाता हैं। भाजपा लंबे समय से इन वर्गों में मजबूत पकड़ बनाए हुए है।
इसके अलावा पहाड़ी मूल के मतदाताओं, ठाकुर और ब्राह्मण समुदाय का भी इस सीट पर अच्छा प्रभाव माना जाता है। अल्पसंख्यक वोटर भी यहां निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
2022 चुनाव में भाजपा की बड़ी जीत
2022 विधानसभा चुनाव में इस सीट पर कुल 77,113 मतदाता थे। यहां 56.89 प्रतिशत मतदान हुआ था। भाजपा प्रत्याशी सविता कपूर को 45,492 वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार सूर्यकांत धस्माना को 24,554 वोट हासिल हुए थे।
2027 चुनाव से पहले बढ़ेगी सियासी गर्मी
अब जैसे-जैसे 2027 विधानसभा चुनाव करीब आएंगे, देहरादून कैंट सीट पर भाजपा के अंदर सियासी हलचल और तेज होती दिखाई देगी। पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी कि वह विरासत और नए नेतृत्व के बीच संतुलन कैसे बनाए।
अब सबकी नजर भाजपा हाईकमान के फैसले पर टिकी है कि पार्टी कैंट सीट पर पुराने भरोसे को कायम रखेगी या नए चेहरे के साथ बड़ा राजनीतिक दांव खेलेगी।



