यूपी में चलती रहेगी ‘प्रधानी’, योगी सरकार का बड़ा दांव! प्रधानों को प्रशासक बनाकर भाजपा ने बिछाई चुनावी बिसात
उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनावों की देरी के बीच योगी सरकार ने ऐसा फैसला लिया है जिसे 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा का बड़ा राजनीतिक मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा है। सरकार ने ग्राम प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने के बावजूद उन्हें ही अगले छह महीने तक प्रशासक बनाकर गांवों की कमान सौंप दी है।
इस फैसले के बाद प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है। माना जा रहा है कि भाजपा ने गांव-गांव में अपनी पकड़ मजबूत करने और प्रधानों को साधने के लिए यह बड़ा कदम उठाया है।
पहली बार प्रधानों को ही मिली प्रशासक की जिम्मेदारी
अब तक पंचायत चुनाव टलने की स्थिति में एडीओ पंचायत जैसे अधिकारियों को प्रशासक बनाया जाता था। लेकिन पिछली बार कई पंचायतों में भ्रष्टाचार, धन के बंदरबांट और विकास कार्य रुकने जैसी शिकायतें सामने आई थीं।
इसी अनुभव को देखते हुए इस बार योगी सरकार ने बड़ा बदलाव करते हुए गांव की जिम्मेदारी सीधे ग्राम प्रधानों को ही सौंप दी। अब प्रधान अगले छह महीने तक गांव की योजनाओं और विकास कार्यों की कमान संभालेंगे।
2027 चुनाव से पहले भाजपा का ‘ग्रामीण कनेक्ट’ मिशन
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह फैसला सिर्फ प्रशासनिक नहीं बल्कि पूरी तरह राजनीतिक रणनीति का हिस्सा भी है। भाजपा गांवों में अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहती है ताकि आगामी चुनावों में इसका सीधा लाभ मिल सके।
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के राजनीति विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर और राजनीतिक विश्लेषक अमित मिश्रा का कहना है कि प्रधान सीधे जनता से जुड़े होते हैं और लोगों का भरोसा भी उन पर ज्यादा होता है। ऐसे में गांवों में सरकार के प्रति यदि कहीं नाराजगी है तो उसे कम करने में मदद मिलेगी।
गांवों में नहीं रुकेंगे विकास कार्य
सरकार के फैसले से अब गांवों में अधूरे विकास कार्य पूरे हो सकेंगे। पंचायतों का बजट खर्च होगा और योजनाओं की रफ्तार बनी रहेगी। इससे ग्रामीण इलाकों में विकास कार्य ठप होने का खतरा भी टल गया है।
प्रधान संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सत्यपाल सिंह ने कहा कि गांव में प्रधान से बेहतर काम कोई नहीं करा सकता। उनका कहना है कि पिछली बार अफसरों के हाथ में पंचायतें जाने से बड़े घोटाले हुए थे, लेकिन इस बार गांवों में सकारात्मक माहौल बनेगा।
1294 ग्राम पंचायतों की कमान प्रधानों के पास
जिले की 1294 ग्राम पंचायतों में 26 मई को प्रधानों का कार्यकाल खत्म हो रहा था। लेकिन सरकार के नए फैसले के बाद अब अगले छह महीने तक पंचायतों की कमान उन्हीं के हाथों में रहेगी।
प्रधानों का कहना है कि इससे अधूरे विकास कार्य पूरे होंगे और गांवों को नई पहचान मिलेगी।
भाजपा को मिलेगा बड़ा राजनीतिक फायदा?
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि भाजपा ने इस फैसले से गांवों के सबसे मजबूत नेटवर्क यानी ग्राम प्रधानों को अपने पक्ष में करने की कोशिश की है। अगर अगले छह महीनों में गांवों में विकास कार्य तेजी से होते हैं तो इसका सीधा राजनीतिक फायदा भाजपा को मिल सकता है।
योगी सरकार का यह फैसला सिर्फ प्रशासनिक व्यवस्था नहीं, बल्कि 2027 की चुनावी रणनीति का बड़ा संकेत माना जा रहा है।



