विधायक निधि रिपोर्ट कार्ड: विकास के मैदान में कोई बना सिकंदर, तो किसी की सुस्ती ने खींचे प्रगति के ब्रेक
अज़हर मलिक
उधमसिंह नगर जिले के विकास का लेखा-जोखा सामने आते ही सियासत का पारा चढ़ गया है, जहाँ जनप्रतिनिधियों के दावों की जमीनी हकीकत का कच्चा चिट्ठा खुलकर सामने आ चुका है। Qq अधिकार से मिले प्रामाणिक आंकड़ों ने साफ कर दिया है कि जनता का प्रतिनिधि बनकर सदन में पहुँचने वाले नेताओं में से किसने जनता के हक का पैसा धरातल पर उतारा और किसने विकास के बजट को सरकारी फाइलों और कागजी पेच-ओ-खम में उलझाकर रख दिया। करोड़ों रुपये के बजट पर कुंडली मारकर बैठने वाले नेताओं की लापरवाही अब जगजाहिर हो चुकी है, जो सीधे तौर पर उन नागरिकों के साथ छलावा है जिन्होंने बुनियादी सुविधाओं की उम्मीद में अपने बहुमूल्य वोट दिए थे।
विकास की इस रेस में नानकमत्ता से विधायक गोपाल सिंह राणा ने कर्मठता का नया मानक तय करते हुए 74 प्रतिशत बजट खर्च कर जिले में पहला मुकाम हासिल किया है। 555 स्वीकृत कार्यों में से 542 प्रोजेक्ट्स को धरातल पर उतारकर उन्होंने साबित कर दिया कि अगर नीयत साफ और इरादे मजबूत हों, तो विकास की रफ्तार को कोई नहीं रोक सकता। इसी तरह सितारगंज से सौरभ बहुगुणा और काशीपुर से त्रिलोक सिंह चीमा ने क्रमशः 72 और 71 फीसदी रकम जनहित के कामों में झोंककर यह दिखा दिया कि जनता का पैसा किस तरह समय पर और सही जगह इस्तेमाल किया जाता है। इन जनप्रतिनिधियों की सक्रियता और जन सरोकारों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता यकीनन काबिले-तारीफ है, जिन्होंने अपने क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को नई ताकत दी है।
लेकिन दूसरी तरफ बाजपुर की बदहाली का मंजर बयां करते आंकड़े सीधे तौर पर विधायक की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार करते हैं, जहाँ 55 प्रतिशत खर्च के साथ विकास की गाड़ी पूरी तरह हांफती नजर आ रही है। सबसे ज्यादा 51 प्रोजेक्ट्स को अधर में लटकाए रखना और सरकारी खजाने में पड़े पैसों का इस्तेमाल न कर पाना सीधे तौर पर जनता की जरूरतों की अनदेखी को दर्शाता है। विकास की इस कछुआ चाल और सुस्ती ने यह साबित कर दिया है कि जब जिम्मेदार ही ढिलाई पर उतर आएं, तो क्षेत्र का विकास खुद-ब-खुद ठप पड़ जाता है। इस रिपोर्ट कार्ड ने साफ संदेश दे दिया है कि काम करने वालों को जनता का सलाम मिलेगा और सिर्फ बयानबाजी करने वालों को अपनी इस नकारा कार्यशैली का जवाब आने वाले समय में खुद जनता की अदालत में देना होगा।



