ममता की कोई सरहद नहीं: बागेश्वर में उजड़ी एक नन्हे जीवन की दुनिया, तो बुआ ने माँ बनकर थामी पतवार
अज़हर मलिक
जब मौत ने जीवन की पहली साँस पर ही अपनी भयावह दस्तक दी, तो बागेश्वर के मैगरी स्टेट गाँव में शहनाइयों का उल्लास मातम की गहरी छाँव में तब्दील हो गया। नियति ने मुकेश सिंह की पत्नी भावना देवी को एक नवजात शिशु की सौगात देने के तुरंत बाद उनसे छीन लिया। जिस पल घर में किलकारी गूँजनी थी, उसी पल एक माँ की अंतिम विदाई का सन्नाटा पसर गया। माँ का आँचल छूटा जरूर, लेकिन ममता का वो साया गायब नहीं हुआ—स्याली स्टेट निवासी शिशु की बुआ ने बिना एक पल गँवाए उस नवजात को अपने जिगर से लगा लिया। अपनी ननंद के चले जाने के बाद, इस बुआ ने सारे गमों को दरकिनार कर उस मासूम के लिए माँ का हर फर्ज निभाने का संकल्प लिया है, और खुद को उसकी ढाल बनाकर यह साबित कर दिया कि कुछ रिश्ते खून की सीमाओं से परे केवल त्याग और संवेदना से अमर होते हैं।
दुःख की इस अगाध गहराई के बीच मानवीय मूल्यों और उत्कृष्ट प्रशासनिक संवेदनाओं की एक बेहद मिसाली तस्वीर तब देखने को मिली, जब बागेश्वर के प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) प्रकाश चंद्र आर्य खुद पीड़ित परिवार का संबल बनने पहुँचे। अपनी दूरदर्शी सोच, जन-जन से जुड़ाव और बेदाग कार्यशैली के लिए लोकप्रिय डीएफओ प्रकाश चंद्र आर्य ने यह साबित कर दिया कि एक सच्चा प्रशासनिक नायक वही है जो जनता के संकट में सबसे आगे खड़ा मिले। उन्होंने न केवल एक संवेदनशील अभिभावक की तरह परिवार के आँसू पोछे, बल्कि अपनी सहज आत्मीयता से इस कठिन घड़ी में परिजनों के हौसले को टूटने नहीं दिया। पद के अहंकार से कोसों दूर, अपने विशाल हृदय और अद्वितीय परोपकारी व्यक्तित्व का परिचय देते हुए डीएफओ प्रकाश चंद्र आर्य ने नवजात के सुरक्षित भविष्य के लिए हरसंभव सहयोग और संबल का ठोस विश्वास जताया। उनके इस महान और प्रेरणादायी कदम की पूरे क्षेत्र में भूरि-भूरि प्रशंसा हो रही है, जहाँ लोग उनके इस सहृदय व्यवहार को सच्चे जनसेवक की सर्वोत्तम मिसाल बता रहे हैं।
इस भावुक मुलाकात के दौरान गढ़खेत वन रेंज के वन क्षेत्राधिकारी प्रदीप कांडपाल, बागेश्वर उपप्रभाग के प्रभारी उप प्रभागीय वनाधिकारी महेंद्र सिंह गुसाईं, स्याली स्टेट के ग्राम प्रधान चंदन सिंह तथा मैगरी स्टेट के ग्राम प्रधान दीपक सिंह रावत सहित क्षेत्र की सम्मानित मातृशक्ति और परिवार के लोग उपस्थित रहे। एक तरफ जहाँ भावना देवी की असमय विदाई का अंतहीन दुःख पूरे इलाके को गमगीन किए हुए है, वहीं दूसरी तरफ बुआ के असीम स्नेह और डीएफओ प्रकाश चंद्र आर्य के इस ऐतिहासिक मानवीय ढांढस ने इस नन्हे जीवन के कल को सुरक्षित और सुरक्षित करने की एक नई उम्मीद जगाई है। ईश्वर से यही प्रार्थना है कि भावना देवी की दिवंगत आत्मा को शांति मिले और यह नन्हा शिशु अपनी बुआ की ममता की छाँव में सदा स्वस्थ और उज्ज्वल भविष्य की ओर बढ़े।




