काशीपुर में शिक्षा के नाम पर उगाही फीस न देने पर बच्चों को परीक्षा से रोका, विरोध में उतरी किसान यूनियन

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काशीपुर में शिक्षा के नाम पर उगाही फीस न देने पर बच्चों को परीक्षा से रोका, विरोध में उतरी किसान यूनियन

 अज़हर मलिक

शिक्षा के मंदिर जब उगाही के अड्डे बन जाएं, तो सवाल उठाना लाजमी हो जाता है। “इक ओंकार” यानी ‘एक परमात्मा’ के पवित्र नाम पर चलने वाले इक ओंकार ग्लोबल एकेडमी स्कूल की आड़ में शिक्षा माफिया के तेवर इस कदर बुलंद हैं कि गरीब बच्चों का भविष्य दांव पर लगाया जा रहा है। फीस न जमा होने पर मासूमों को परीक्षा से बाहर करने का यह सनसनीखेज मामला अब तूल पकड़ चुका है। जब पीड़ित परिजनों ने आवाज उठाई, तो उलटे उन पर ही झूठे आरोप मढ़ने का खेल शुरू हो गया। लेकिन इस अन्याय के खिलाफ अब किसान यूनियन खुलकर मैदान में आ गई है।

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शिक्षा के नाम पर लूट का अड्डा: इक ओंकार ग्लोबल एकेडमी पर किसान यूनियन का बड़ा हमला!

पवित्र नाम ‘इक ओंकार’ का सहारा लेकर संचालित हो रहे इक ओंकार ग्लोबल एकेडमी स्कूल में शिक्षा के नाम पर वसूली और तानाशाही का खुला खेल चल रहा है। मामला तब गरमा गया जब स्कूल प्रबंधन ने महज फीस बकाया होने के कारण मासूम बच्चों को परीक्षाओं में बैठने से रोक दिया। शिक्षा देने का दावा करने वाले इन संचालकों का रवैया किसी माफिया से कम नजर नहीं आ रहा। पीड़ित बच्चों और अभिभावकों के समर्थन में उतरी भारतीय किसान यूनियन के नेताओं ने आईटीआई थाने पहुंचकर जोरदार विरोध दर्ज कराया। किसान नेताओं ने पुलिस प्रशासन को तहरीर सौंपते हुए स्कूल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। थाने पहुंचे किसान नेताओं ने स्कूल प्रबंधन द्वारा फैलाई जा रही झूठी शिकायतों और बयानों का करारा खंडन किया। नेताओं ने स्कूल संचालकों को खुला चैलेंज देते हुए कहा— “अगर तुम्हारी बात में जरा भी दम है और तुम सच्चे हो, तो सामने आकर जवाब दो। गरीबों और किसानों के बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” शिक्षा विभाग और मानकों पर बड़े सवालिया निशान  इस पूरी घटना ने जिले के शिक्षा विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशैली को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है। क्या इक ओंकार ग्लोबल एकेडमी स्कूल शासन द्वारा तय किए गए सभी मानकों को पूरा करता है? क्या इसके पास सीबीएसई बोर्ड की वैध मान्यता और सुरक्षा संबंधी जरूरी NOC मौजूद हैं? शिक्षकों की योग्यता पर सवाल जो लोग वहां बच्चों के भविष्य की नींव रख रहे हैं, क्या वे खुद पढ़ाने योग्य हैं? स्कूल में तैनात अध्यापकों की शैक्षणिक योग्यता क्या है, यह अभी तक एक बड़ा रहस्य बना हुआ है। अधिकारियों की चुप्पी  क्या शिक्षा विभाग के बड़े अधिकारी इन शिक्षा माफियाओं के सामने नतमस्तक हैं, या फिर किसी बड़ी साठगांठ के चलते अब तक इस स्कूल पर कोई प्रशासनिक चाबुक नहीं चला है?

 

 

 

धर्म और शिक्षा के नाम पर दुकानदारी चलाने वाले ऐसे माफियाओं पर आखिर कब शिकंजा कसेगा? किसान यूनियन के इस कड़े रुख के बाद अब देखना यह होगा कि बेपरवाह बना शिक्षा विभाग और पुलिस प्रशासन इस अहंकारी स्कूल प्रबंधन पर क्या कार्रवाई करता है। अगर समय रहते इन पर नकेल नहीं कसी गई, तो यह लड़ाई सड़कों तक पहुंचेगी।,

 

 

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