राजनीतिक गलियारों में खलबली: रायबरेली की सड़कों पर उतरा वैश्य समाज, दिखाई अपनी सियासी ताकत
नरेंद्र त्रिपाठी रायबरेली
सफेद कपड़ों का सैलाब, जोश से गूंजते नारे और शहर के मुख्य मार्गों पर कदमताल करती व्यापारियों की फौज—रायबरेली की फिजाओं में इन दिनों कुछ अलग ही गर्माहट है। मौका किसी आम उत्सव का नहीं, बल्कि उस राजनीतिक ताकत के प्रदर्शन का है, जिसे अब तक खामोश समझा जा रहा था। आगामी चुनावों के समीकरणों को अपने पाले में मोड़ने की ठान चुके वैश्य समाज ने सड़कों पर उतरकर यह बता दिया है कि वे केवल व्यापार करना नहीं, बल्कि सियासत की चाल बदलना भी बखूबी जानते हैं।
वैश्य एकता परिषद के आह्वान पर आयोजित यह भव्य पदसंचलन शहर के मुख्य बाजारों से गुजरा। इस दौरान जगह-जगह हुई पुष्पवर्षा ने यह साबित कर दिया कि समाज अब केवल हशिये पर बैठने को तैयार नहीं है। इस शक्ति प्रदर्शन का असली मकसद क्या है और आगामी 27 अक्टूबर को रिफॉर्म क्लब के मैदान में होने वाले महासम्मेलन से सियासी दलों की नींद क्यों उड़ी हुई है, इसकी सुगबुगाहट पूरे जिले में तेज हो गई है।
परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सुमंत गुप्ता ने पदसंचलन के दौरान साफ शब्दों में कहा कि व्यापारी समाज अब अपनी आर्थिक और राजनीतिक ताकत को पहचान चुका है। यह सिर्फ एक मार्च नहीं, बल्कि आने वाले चुनावों के लिए राजनीतिक दलों को एक खुली चेतावनी और संदेश है कि वैश्य समाज किसी भी दल के सियासी समीकरण को बनाने या बिगाड़ने की पूरी क्षमता रखता है।
पदसंचलन की शुरुआत के बाद जब यह काफिला रिफॉर्म क्लब से आगे बढ़ा, तो शहर के हर चौराहे पर एक अलग ही उत्साह देखने को मिला। अस्पताल चौराहा, दीवानी कचहरी गेट, बस स्टॉप, खोया मंडी, कैपरगंज, घंटाघर, सुपर मार्केट, यूनियन बैंक चौराहा और हाथी पार्क जैसे प्रमुख स्थलों पर समाज के प्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों ने पलक-पांवड़े बिछाकर पदसंचलन में शामिल लोगों का स्वागत किया। जगह-जगह हुई फूलों की वर्षा ने इस आयोजन को एक जनआंदोलन का रूप दे दिया।
तमाम राजनीतिक दलों के समीकरणों को हिलाने वाले इस आयोजन में लालगंज नगर पंचायत की अध्यक्ष सरिता गुप्ता ने भी अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराई। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब समय आ गया है जब समाज को भीख मांगने के बजाय अपनी राजनीतिक हिस्सेदारी खुद तय करनी होगी। परिषद के राष्ट्रीय महासचिव इं. विजय रस्तोगी के अनुसार, 27 अक्टूबर का रिफॉर्म क्लब का सम्मेलन केवल एक सभा नहीं होगी, बल्कि यह आगामी 2027 के चुनावों के लिए वैश्य समाज की विशेष भागीदारी की नींव रखेगा।
जिला अध्यक्ष राजकुमार गुप्ता एडवोकेट ने जानकारी दी कि रिफॉर्म क्लब में आयोजित होने वाले इस महासम्मेलन में विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि भी शिरकत करेंगे। इस मंच से सिर्फ एक ही एजेंडा गूंजेगा—समाज की मजबूती और सत्ता में सीधी हिस्सेदारी। आर बी वैश्य, वीरेंद्र अग्रहरि, डॉ. जे के मोदनवाल, संजय जयसवाल, अतुल गुप्ता, के. के अग्रहरि, गणेश कसौधन, धर्मेंद्र वर्मा, मधुरेंद्र वैश्य एडवोकेट, जुगल किशोर गुप्ता और राकेश गुप्ता समेत सैकड़ों दिग्गजों की मौजूदगी ने यह साफ कर दिया है कि इस बार लड़ाई आर-पार की है।
अब सबकी निगाहें 27 अक्टूबर को रिफॉर्म क्लब में होने वाले उस बड़े सम्मेलन पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि वैश्य समाज की यह सियासी हुंकार आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की राजनीति में क्या नया भूचाल लाने वाली है।




