किशाऊ बहु-उद्देशीय बांध परियोजना पर छह राज्यों के बीच बनी ऐतिहासिक सहमति, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विजन और प्रयासों से साकार होगा स्वच्छ यमुना का सपना
अज़हर मलिक
नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और उच्च स्तरीय बैठक में वर्षों से लंबित ‘किशाऊ बहु-उद्देशीय बांध परियोजना’ को लेकर संबंधित राज्यों के बीच एक ऐतिहासिक और युगांतकारी सहमति बन गई है, जिसमें उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अत्यंत सक्रिय, दूरदर्शी और प्रभावशाली भूमिका रही।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्र और जनहित के मुद्दों पर चलाए जा रहे ‘संवाद से समाधान’ के संकल्प को चरितार्थ करते हुए इस बैठक में देवभूमि उत्तराखंड के हितों और देश की आवश्यकताओं को सर्वोपरि रखा गया। बैठक के दौरान उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने कुशल नेतृत्व, प्रशासनिक सूझबूझ और दृढ़ निश्चय का परिचय देते हुए न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे क्षेत्र के विकास के लिए इस परियोजना के महत्व को बेहद प्रभावी ढंग से रेखांकित किया। मुख्यमंत्री धामी के इसी सकारात्मक और सहयोगात्मक दृष्टिकोण के चलते हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान जैसे सभी भागीदार राज्य “किशाऊ बहु-उद्देशीय परियोजना” के सफल क्रियान्वयन के लिए अंततः समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करने के लिए पूरी तरह सहमत हो गए। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री धामी ने इस दौरान देवभूमि की जल संपदा और ऊर्जा क्षमता का देशहित में बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के लिए कई अहम सुझाव दिए, जिन्हें बैठक में बेहद गंभीरता से स्वीकार किया गया। इस ऐतिहासिक समझौते के संपन्न होने के बाद अब इस विशाल और बहुप्रतीक्षित किशाऊ परियोजना को अंतिम और औपचारिक अनुमोदन के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा, जो उत्तराखंड और देश के विकास चक्र को एक नई गति प्रदान करेगा।
इस पूरी महत्वाकांक्षी योजना के वित्तीय ढांचे पर यदि दृष्टि डालें, तो मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सतत प्रयासों और केंद्रीय नेतृत्व के तालमेल से यह तय किया गया है कि किशाऊ बहु-उद्देशीय बांध परियोजना के जल घटक (Water Component) के कार्य की कुल लागत का 90 प्रतिशत हिस्सा केंद्रीय सहायता के रूप में केंद्र सरकार द्वारा वहन किया जाएगा, जबकि शेष 10 प्रतिशत की बेहद मामूली राशि का वित्तीय भार सभी छह राज्यों द्वारा आपस में बांटा जाएगा। इसके अलावा, बिजली उत्पादन से जुड़े विद्युत घटक की लागत को साझा करने की व्यवस्था पर भी विस्तार से चर्चा हुई, जिसमें हिमाचल प्रदेश के हिस्से की लागत को साझा करने के एवज में उसके हिस्से का आवंटित पानी दिल्ली और राजस्थान को हस्तांतरित करने पर सर्वसम्मति बनी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस निर्णय का पुरजोर स्वागत करते हुए इसे देश की राजधानी और मरुभूमि राजस्थान के लिए एक संजीवनी बताया। धामी का मानना है कि यह दूरगामी फैसला हमारी आस्था और जीवनदायिनी नदी यमुना जी के पुनर्जीवीकरण की दिशा में एक बहुत बड़ा और निर्णायक मील का पत्थर सिद्ध होगा, जिससे यमुना नदी में निरंतर शुद्ध और निर्मल जल का प्रवाह बढ़ेगा। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति और उनके द्वारा रखे गए तर्कों ने इस पूरी बैठक को एक नई दिशा दी, जहां केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी आर पाटिल और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू सहित देश के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों, केंद्रीय गृह सचिव और पीएमओ के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री धामी का नेतृत्व पूरी तरह निखरकर सामने आया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के इन अभूतपूर्व और भगीरथ प्रयासों के कारण ही दशकों से फाइलों में अटकी यह किशाऊ परियोजना अब हकीकत की जमीन पर उतरने को तैयार है, जो आने वाले समय में उत्तराखंड को आर्थिक और ढांचागत रूप से सशक्त बनाने के साथ-साथ पूरे उत्तर भारत के पर्यावरण और जल संकट को दूर करने में सबसे अहम भूमिका निभाएगी।



