हिमाचल में बड़ा जल प्रोजेक्ट: चिनाब-ब्यास लिंक टनल को केंद्र की मंजूरी, सिंधु जल संधि निलंबन के बाद तेज हुई तैयारी

हिमाचल में बड़ा जल प्रोजेक्ट: चिनाब-ब्यास लिंक टनल को केंद्र की मंजूरी, सिंधु जल संधि निलंबन के बाद तेज हुई तैयारी
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हिमाचल में बड़ा जल प्रोजेक्ट: चिनाब-ब्यास लिंक टनल को केंद्र की मंजूरी, सिंधु जल संधि निलंबन के बाद तेज हुई तैयारी

हिमाचल प्रदेश में बहुचर्चित चिनाब-ब्यास लिंक टनल परियोजना को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। लाहौल क्षेत्र में चंद्रा नदी के अतिरिक्त पानी को ब्यास बेसिन की ओर मोड़ने वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद अब इसके जल्द शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है।

सिंधु जल संधि के निलंबन के बाद इस परियोजना को रणनीतिक और राष्ट्रीय हितों से जोड़कर देखा जा रहा है। नई दिल्ली में इसको लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं, हालांकि आधिकारिक घोषणा का अभी इंतजार है।

पीर पंजाल के नीचे बनेगी 8.7 किलोमीटर लंबी सुरंग

परियोजना के तहत लाहौल के कोकसर क्षेत्र में पीर पंजाल पर्वत के नीचे करीब 8.7 किलोमीटर लंबी सुरंग बनाई जाएगी। इस टनल निर्माण पर लगभग 2,352 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।

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इसके अलावा गाद प्रबंधन प्रणाली समेत पूरी परियोजना पर करीब 2,600 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

चंद्रा नदी पर बनेगा बैराज

योजना के अनुसार लाहौल घाटी में चंद्रा नदी पर 19 मीटर ऊंचा बैराज भी बनाया जाएगा। इसके जरिए नदी के जल प्रवाह को नियंत्रित कर सुरंग नेटवर्क के माध्यम से ब्यास बेसिन की ओर मोड़ा जाएगा।

सूत्रों के मुताबिक यह पूरी परियोजना एक बड़े हाइड्रोलिक और सुरंग नेटवर्क सिस्टम का हिस्सा होगी।

4000 मेगावाट बिजली उत्पादन की संभावना

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह परियोजना जमीन पर उतरती है तो हिमाचल प्रदेश में जलविद्युत उत्पादन क्षमता में बड़ा इजाफा हो सकता है। अनुमान है कि इससे करीब 4000 मेगावाट अतिरिक्त बिजली उत्पादन का आधार तैयार होगा।

इसके अलावा जल प्रबंधन और सिंचाई व्यवस्था में भी सुधार होने की संभावना जताई जा रही है।

सिंधु जल संधि से जुड़ा अहम कदम

यह परियोजना सिंधु जल संधि 1960 के तहत पश्चिमी नदियों के जल उपयोग से जुड़ी मानी जा रही है। पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि के निलंबन और ऑपरेशन सिंदूर के बाद केंद्र सरकार के इस कदम को रणनीतिक रूप से भी काफी अहम माना जा रहा है।

पर्यावरणीय अध्ययन भी जरूरी

हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी बड़ी परियोजना के लिए पर्यावरणीय और भौगोलिक पहलुओं का विस्तृत अध्ययन बेहद जरूरी होगा। पहाड़ी क्षेत्रों में सुरंग और बैराज निर्माण का असर स्थानीय पारिस्थितिकी पर भी पड़ सकता है।

अनुराग ठाकुर ने बताया राष्ट्रीय हित का फैसला

सांसद Anurag Singh Thakur ने कहा कि चिनाब-ब्यास लिंक टनल परियोजना हिमाचल समेत पूरे उत्तर भारत के लिए लाभकारी साबित होगी। उन्होंने इसे जल और ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम बताया।

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