कार्बेट काटेज रिसोर्ट’ की तानाशाही नियमों को पैरों तले रौंदकर बजाया डीजे, पुलिस ने होटल स्वामी को खींचा कटघरे में!
सलीम अहमद साहिल
क्या जिम कार्बेट जैसे संवेदनशील ईको-जोन में नियम सिर्फ आम जनता के लिए हैं, या फिर रसूखदार रिसोर्ट मालिक खुद को कानून से ऊपर समझने लगे हैं? ढेला स्थित ‘कार्बेट काटेज रिसोर्ट’ में बीती रात जो कुछ भी हुआ, उसने न केवल वन्यजीवों की शांति में खलल डाला, बल्कि रिसोर्ट स्वामी की तानाशाही और नियमों के प्रति उनकी बेरुखी को भी सरेआम बेनकाब कर दिया। अपनी जेबें भरने और सैलानियों को अवैध ‘शोर’ परोसने की चाहत में रिसोर्ट प्रबंधन ने देवभूमि की मर्यादा को ताक पर रख दिया।
जिम कार्बेट नेशनल पार्क का ढेला क्षेत्र, जो अपनी शांति और दुर्लभ वन्यजीवों के लिए जाना जाता है, बीती रात ‘कार्बेट काटेज रिसोर्ट’ की मनमानी का गवाह बना। रिसोर्ट के भीतर नियमों को कुचलते हुए जिस तरह से लाउड डीजे का शोर मचाया जा रहा था, उसने प्रशासन के उन दावों पर सवालिया निशान लगा दिया जो ईको-सेंसिटिव जोन की सुरक्षा के लिए किए जाते हैं। आखिर रिसोर्ट स्वामी अनुप सिंह भाटी को यह हिम्मत कहाँ से मिली कि वह रात के सन्नाटे में तेज आवाज के साथ पर्यावरण और वन्यजीव कानून की धज्जियां उड़ा सकें? क्या फरीदाबाद से आकर उत्तराखंड की धरती पर व्यापार करने वाले इन मालिकों के लिए यहाँ के नियम महज एक कागज का टुकड़ा हैं?
शिकायत मिलते ही जब पुलिस की टीम मौके पर पहुँची, तो नजारा चौंकाने वाला था। पुलिस ने तत्काल दखल देते हुए डीजे को बंद कराया और रिसोर्ट के भीतर चल रही इस अवैध गतिविधि पर लगाम लगाई। पुलिस ने रिसोर्ट स्वामी अनुप सिंह भाटी पुत्र सुभाष चन्द्र भाटी के खिलाफ पुलिस एक्ट में चालान काटकर यह साफ कर दिया कि वर्दी की नजर से कोई तानाशाही बच नहीं पाएगी। केवल चालान ही नहीं, बल्कि एक सख्त विधिक नोटिस जारी कर रिसोर्ट को भविष्य के लिए अंतिम चेतावनी भी दी गई है।
सवाल यह उठता है कि क्या महज एक चालान से ‘कार्बेट काटेज रिसोर्ट’ जैसे प्रतिष्ठानों की मनमानी रुक पाएगी? या फिर ये रसूखदार मालिक इसी तरह बार-बार नियमों को ठेंगा दिखाते रहेंगे? प्रशासन की इस कार्रवाई ने भले ही फिलहाल डीजे की आवाज शांत कर दी हो, लेकिन रिसोर्ट स्वामी के इस अड़ियल और गैर-जिम्मेदाराना रवैये ने स्थानीय जनता और पर्यावरण प्रेमियों के मन में कई गंभीर सवाल छोड़ दिए हैं।



