🔥 राहुल गांधी पर SC/ST एक्ट का बड़ा प्रहार: हल्द्वानी में दर्ज हुई FIR से थर्राई देश की सियासत! 🔥
दलित स्वाभिमान और धार्मिक आस्था के टकराव के बीच हल्द्वानी का रामलीला मैदान अब एक बड़े सियासी भूचाल का केंद्र बन चुका है। 8 अगस्त को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा के बाद छिड़के गए गंगाजल और हुए हवन की आंच अब सीधे दिल्ली तक पहुंच गई है। जिस मैदान से कांग्रेस ने हुंकार भरी थी, वहीं से शुरू हुई ‘शुद्धीकरण’ की विवादित सियासत ने कानूनी लड़ाई का भयावह मोड़ ले लिया है। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा धमाका तब हुआ जब हल्द्वानी कोतवाली पुलिस ने देश के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ संगीन धाराओं में मुकदमा (FIR No. 297/26) दर्ज कर लिया। शिकायतकर्ता अमित कुमार की तहरीर पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196, 299 के साथ-साथ कड़े SC/ST एक्ट की धारा 3(1)(q) के तहत मामला कायम किया है।
इस पूरे सियासी बवंडर की शुरुआत तब हुई जब शनिवार को राहुल गांधी ने दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय से हल्द्वानी के रामलीला मैदान में हुए कथित शुद्धीकरण की तस्वीरें दिखाते हुए इसे दलित अपमान और सामाजिक भेदभाव से जोड़ दिया। राहुल गांधी के इस जुबानी हमले ने जहां कांग्रेस को आक्रामक रुख में ला खड़ा किया, वहीं शुद्धीकरण कार्यक्रम में शामिल लोगों ने इसे धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ और खुद को कटघरे में खड़ा करने की साजिश करार दिया। अमित कुमार का साफ तौर पर आरोप है कि राहुल गांधी के बयान ने रामलीला मैदान में अनुष्ठान करने वाले दलित समाज और श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है तथा उन्हें जानबूझकर नीचा दिखाने का काम किया है।
उत्तराखंड की शांत फिजाओं में घुला यह सियासी जहर अब दोनों तरफ से कानूनी हथियारों से लड़ा जा रहा है। एक तरफ जहां कांग्रेस खड़गे के दलित होने के नाते हुए इस ‘शुद्धीकरण’ को भाजपा की मानसिकता का सबूत बताकर सड़क से थाने तक घेराबंदी कर रही है, वहीं दूसरी तरफ राहुल गांधी पर दर्ज हुई इस FIR ने सत्तापक्ष और विरोधी खेमे के बीच की जंग को और भीषण बना दिया है। आने वाले विधानसभा चुनावों की दहलीज़ पर खड़ा उत्तराखंड अब सामाजिक न्याय और धार्मिक आस्था के नाम पर होते इस शक्ति-प्रदर्शन का गवाह बन रहा है, जहां एक बयान ने देवभूमि की राजनीति में वह उबाल ला दिया है जिसकी तपन आने वाले दिनों में और तेज होना तय है।



