खौफ का सन्नाटा और आदमखोर का साया: बिजली विभाग की तानाशाही से मालधन में दांव पर लगीं 30 हजार जानें
सलीम अहमद साहिल
रात का गाढ़ा सन्नाटा, दम घोंटती उमस और अचानक छा जाने वाला ब्लैकआउट… यह कोई किसी हॉरर फिल्म का मंजर नहीं, बल्कि रामनगर के मालधन क्षेत्र की वो खौफनाक हकीकत है जहां बिजली विभाग की लापरवाही सूरज ढलते ही लोगों को मौत के मुंह में धकेल देती है। सितंबर की झुलसाने वाली गर्मी में जब बिना किसी सूचना के बत्ती गुल होती है, तो घरों के भीतर घुटन से सांस लेना दूभर हो जाता है, लेकिन जैसे ही बेबस ग्रामीण राहत की सांस लेने चौखट से बाहर कदम रखते हैं, सामने काल बनकर खड़ा मिलता है जंगलों पर राज करने वाला खूंखार शिकारी। मालधन की करीब 30 हजार की आबादी इस वक्त बिजली विभाग की अघोषित कटौती और तानाशाही के कारण एक ऐसे चक्रव्यूह में फंसी है, जहां हर एक रात अपनी जान हथेली पर रखकर काटनी पड़ रही है।
रोस्टिंग का बहाना बनाकर जब मन चाहे घंटों के लिए मालधन को अंधेरे के गर्त में धकेल देना अब बिजली विभाग का रोज का रवैया बन चुका है। विभाग की इस घोर बेरुखी का फायदा सीधे तौर पर इलाके में घूम रहा खूंखार गुलदार उठा रहा है, जो स्याह अंधेरा छाते ही बेखौफ होकर रिहायशी इलाकों में चहलकदमी करने लगता है। ग्रामीण भली-भांति जानते हैं कि रात के इस भयानक अंधेरे में घर से बाहर एक कदम भी निकालना अपनी जान से खिलवाड़ करना है, लेकिन बंद कमरों की खौफनाक गर्मी उन्हें बाहर निकलने पर मजबूर कर देती है। आखिर मालधन जैसे संवेदनशील ग्रामीण इलाके में रात के समय किसकी शह पर यह अघोषित कटौती की जा रही है? क्या बिजली विभाग के अधिकारियों को 30 हजार ग्रामीणों के दर्द और उनकी सुरक्षा का जरा भी अहसास नहीं है? सवाल सीधा है कि यदि इस अंधेरे का फायदा उठाकर खूंखार शिकारी किसी मासूम ग्रामीण को अपना निवाला बना लेता है, तो उस बहते खून और उठती अर्थी की सीधी जिम्मेदारी बिजली विभाग क्यों नहीं लेगा?

एक तरफ सरकार गांव-गांव को रोशन करने और सुरक्षा देने के बड़े-बड़े दावे करती है, तो दूसरी तरफ बिजली विभाग की मनमानी ने मालधन के लोगों को गर्मी, अंधेरे और गुलदार के खौफ के बीच घुट-घुटकर जीने पर मजबूर कर दिया है। विभाग की इस आंख मूंदने वाली व्यवस्था के खिलाफ अब पूरे इलाके में जनाक्रोश उबल रहा है और ग्रामीणों का सब्र पूरी तरह जवाब दे चुका है। मालधन की जनता ने अब सीधे शब्दों में अल्टीमेटम दे दिया है कि यदि बिजली विभाग ने अपनी यह तानाशाही और अघोषित कटौती तुरंत बंद नहीं की, तो वे दफ्तरों का घेराव कर उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी और खामियाजा सीधे तौर पर लापरवाह बिजली विभाग को ही भुगतना पड़ेगा।



