डिग्री हाथ में आते ही सोशल मीडिया पर बन गए ‘वकील’, काशीपुर में फर्जी एडवोकेट्स की बाढ़, कानून की धज्जियां उड़ा रहे नटवरलाल
अज़हर मलिक
उत्तराखंड के जिला उधम सिंह नगर स्थित काशीपुर में इन दिनों सोशल मीडिया पर फर्जी ‘एडवोकेट’ बनने का एक अजीबोगरीब दौर देखने को मिल रहा है। फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप के बायो से लेकर गाड़ियों की नंबर प्लेट और मकानों के बाहर लगी नेम प्लेट तक पर लोग धड़ल्ले से अपने नाम के आगे ‘एडवोकेट’ लिखकर रौब झाड़ रहे हैं। हकीकत यह है कि इनमें से ज्यादातर लोगों ने सिर्फ लॉ की डिग्री यानी एलएलबी पास की है या फिर किसी संस्थान से कानून की पढ़ाई पूरी की है। बिना किसी कानूनी प्रक्रिया, बिना स्टेट बार काउंसिल में एनरोलमेंट और बिना ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन (AIBE) पास किए ही ये लोग खुद को वकील बताकर समाज और प्रशासनिक गलियारों में अपनी धाक जमाने में लगे हैं। काशीपुर के इस नटवरलाली खेल से असली और निष्ठावान अधिवक्ताओं की साख पर भी असर पड़ रहा है, क्योंकि कानून के जानकारों का स्पष्ट कहना है कि केवल एलएलबी की डिग्री हाथ में आने से कोई व्यक्ति वकील या एडवोकेट नहीं बन जाता।
नियम और कानून के मुताबिक अपने नाम के आगे ‘एडवोकेट’ शब्द का इस्तेमाल केवल वही व्यक्ति कर सकता है जिसने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) द्वारा मान्यता प्राप्त संस्थान से एलएलबी करने के बाद राज्य की स्टेट बार काउंसिल में अपना एनरोलमेंट कराया हो और एआईबीई की परीक्षा पास करके वकालत का लाइसेंस (Certificate of Practice) हासिल किया हो। जो लोग केवल एलएलबी की डिग्री लेकर बैठे हैं, वे सिर्फ ‘लॉ ग्रेजुएट’ कहलाते हैं, उन्हें नाम के आगे ‘Advocate’ या ‘Adv.’ लिखने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। इसके अलावा, यदि किसी व्यक्ति के पास वकालत की सनद है भी, लेकिन वह कोई पूर्णकालिक (Full-time) प्राइवेट या सरकारी नौकरी कर रहा है या कोई दूसरा व्यापार चला रहा है, तो उसे अपनी प्रैक्टिस सस्पेंड करानी होती है और वह भी नाम के आगे एडवोकेट नहीं लिख सकता। काशीपुर में चल रहे इस फर्जीवाड़े पर बार काउंसिल और स्थानीय प्रशासन को कड़ा संज्ञान लेते हुए कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि कानून के नाम पर जनता को गुमराह करने वाले ऐसे नटवरलालों पर लगाम कसी जा सके।



